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वन्यजीव संरक्षण

वन्यजीव संरक्षण: परिचय और महत्व

वन्यजीव संरक्षण का अर्थ है उन जंगली जीवों, पक्षियों और अन्य जीवों की रक्षा और प्रबंधन करना ताकि वे सुरक्षित रहें और उनके प्राकृतिक आवास नष्ट न हों। यह संरक्षण न केवल जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों से भी महत्वपूर्ण है।

पारिस्थितिकीय महत्व: वन्यजीव पारिस्थितिक तंत्र के खाने-पीने के तंत्र, प्रदूषण नियंत्रण, जल चक्र तथा मृदा संरक्षण में मदद करते हैं।
आर्थिक महत्व: वन्यजीव पर्यटन, औषधीय सामग्री, वनों से मिलने वाले उत्पादों आदि के माध्यम से आर्थिक लाभ होता है।
सांस्कृतिक महत्व: हमारे धार्मिक एवं सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में वन्यजीवों का विशेष स्थान है।

भारत अपनी जैव विविधता के कारण विश्व के प्रमुख जैविक केन्द्रों में आता है। देश में कई दुर्लभ और संकटग्रस्त जीव प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनका संरक्षण अनिवार्य है। इसलिए, वन्यजीव संरक्षण के प्रयास भारत की पारिस्थितिकी, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक हैं।

वन्यजीव संरक्षण के तरीके

वन्यजीव संरक्षण के दो मुख्य तरीके होते हैं: प्राकृतिक संरक्षण और कृत्रिम संरक्षण. इन दोनों विधियों द्वारा जीवों और उनके आवास की रक्षा की जाती है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रकार
विधि परिभाषा उदाहरण लाभ
अंतःस्थलीय संरक्षण (In-situ) प्राकृतिक आवास में ही जीव संरक्षण करना, जहाँ वे स्वाभाविक रूप से रहते हैं। राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र। प्राकृतिक व्यवहार एवं जैविक विविधता बरकरार रहती है।
बहिःस्थलीय संरक्षण (Ex-situ) वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर रखकर संरक्षित करना। चिड़ियाघर, प्रजनन केंद्र, बायोरेpositories। खतरे में पड़े प्रजातियों को बढ़ावा देने का अवसर।

इन विधियों को अक्सर संयोजित रूप में प्रयोग किया जाता है ताकि संरक्षण की सफलता बढीखर सके। उदाहरण के लिए, यदि किसी प्रजाति के प्राकृतिक आवास में लगातार खतरा है, तो उसे पहले बहिःस्थलीय तरीके से बचाया जा सकता है और बाद में पुनः उनके प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा जा सकता है।

राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य

राष्ट्रीय उद्यान - ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ वन्य जीवों को पूर्ण संरक्षण दिया जाता है और मानव गतिविधियों की सख्त पाबंदी होती है।
अभयारण्य - ऐसे क्षेत्र जहाँ वन्य जीवों को संरक्षण तो दिया जाता है, लेकिन कुछ सीमित मानव क्रियाएँ भी अनुमति प्राप्त होती हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972

भारत सरकार ने वन्यजीवों की रक्षा के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 पारित किया। यह अधिनियम वन्यजीवों के शिकार, व्यापार तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए कड़ी व्यवस्था करता है।

  • मुख्य प्रावधान: विभिन्न प्रजातियों की सुरक्षा के लिए सूचना सूची (Schedules) निर्धारित की गईं हैं।
  • पहली अनुसूची: पूर्ण प्रतिबंधित प्रजातियाँ जिनका शिकार सख्त मना है (जैसे बंगाल टाइगर, भारतीय एक角)।
  • दूसरी अनुसूची: उन प्रजातियों की सूची जिन्हें विशेष संरक्षण देना आवश्यक है।
  • पेनाल्टी: अधिनियम के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कारावास का प्रावधान है।

यह अधिनियम भारत की वन नीति और जैव विविधता संरक्षण से जुड़ी अन्य पहल के साथ एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संधियाँ

वन्यजीव संरक्षण का प्रयास राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होता है। भारत ने अनेक अंतरराष्ट्रीय संधियों से समझौता किया है, जिनका उद्देश्य है वैश्विक जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण। प्रमुख संधियाँ हैं:

  • CITES (संसाधित प्रजातियों का व्यापार पर नियंत्रण संधि): यह संधि वन्यजीवों और उनके उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करती है। भारत इसका सक्रिय सदस्य है।
  • CBD (जैव विविधता पर संधि): वर्ष 1992 में जारी यह संधि जैव विविधता की सुरक्षा और सतत उपयोग पर केन्द्रित है। भारत ने इसे अपनाकर विविध संरक्षण योजनाएँ लागू की हैं।
ध्यान दें: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम एक राष्ट्रीय स्तर का कानून है, जबकि CITES और CBD अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं। इनका उद्देश्य और क्षेत्र अलग-अलग होता है। परीक्षा में इनके बीच का फर्क समझना आवश्यक है।

राष्ट्रीय उद्यान स्थापना प्रक्रिया: कार्यप्रणाली (Worked Example 1)

Example 1: राष्ट्रीय उद्यान स्थापना की प्रक्रिया Medium
भारत में किसी क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की प्रक्रिया बताइए।

Step 1: प्रस्तावित क्षेत्र की पहचान - पर्यावरण विशेषज्ञ, वन विभाग या सरकार द्वारा संभावित क्षेत्र का चयन किया जाता है।

Step 2: सर्वेक्षण और अध्ययन - क्षेत्र की जैव विविधता, पारिस्थितिकी, भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किया जाता है।

Step 3: जनता की भागीदारी - प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से परामर्श लिया जाता है ताकि सामाजिक विरोध कम हो।

Step 4: सरकार द्वारा अधिसूचना - केंद्र या राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत आधिकारिक अधिसूचना जारी करती है।

Step 5: विधिक सुरक्षा और प्रबंधन योजना - क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर संरक्षित किया जाता है, और उसके बाद वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रबंधन योजना बनाई जाती है।

Answer: यह प्रक्रिया प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए वन्यजीव संरक्षण के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है।

graph TD    A[प्रस्तावित क्षेत्र की पहचान] --> B[सर्वेक्षण एवं अध्ययन]    B --> C[जनता की भागीदारी]    C --> D[सरकार की अधिसूचना]    D --> E[राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना]    E --> F[प्रबंधन योजना बनाना]

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के शेड्यूल (Worked Example 2)

Example 2: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के शेड्यूल की पहचान Easy
नीचे दिए गए जानवरों में से कौन-से पहली अनुसूची में शामिल हैं?
1) बंगाल टाइगर
2) भारतीय मयूर
3) भारतीय लाल मृग
4) ग्रेटर मयूर

Step 1: पहली अनुसूची में ऐसे जानवर शामिल हैं जिनका शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है, जैसे तेंदुआ, शेर, टाइगर आदि।

Step 2: बंगाल टाइगर पहली अनुसूची में आता है।

Step 3: भारतीय मयूर और ग्रेटर मयूर दूसरी अनुसूची या अन्य अनुसूचियों में आते हैं, इनका शिकार सशर्त होता है।

Step 4: भारतीय लाल मृग (Indian Antelope) तीसरी या चौथी अनुसूची में शामिल हो सकता है।

Answer: केवल बंगाल टाइगर पहली अनुसूची में है।

अवैध शिकार से बचाव: उदाहरण और रणनीतियाँ (Worked Example 3)

Example 3: अवैध शिकार और संरक्षण में समुदाय की भूमिका Medium
प्रोजेक्ट टाइगर के तहत अवैध शिकार से बचाव के लिए कौन-कौन सी रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं? बताएँ।

Step 1: पेट्रोलिंग और निगरानी: वन विभाग पुलिस की तैनाती करता है ताकि अवैध शिकार की गतिविधियों को रोका जा सके।

Step 2: समुदाय सहभागिता: स्थानीय लोगों को वन्यजीव संरक्षण में शामिल कर जागरूकता बढ़ायी जाती है। वे संरक्षण के भागीदार बनते हैं।

Step 3: प्रतिसाधन प्रबंधन: शिकारियों द्वारा इस्तेमाल उपकरण जब्त किए जाते हैं, और सदमे वाले इलाकों में निगरानी बल होते हैं।

Step 4: प्रौद्योगिकी का प्रयोग: कैमरा ट्रैप्स, ड्रोन आदि द्वारा जंगल की निगरानी की जाती है।

Answer: इन रणनीतियों से अवैध शिकार में भारी कमी आई है और टाइगर आबादी में स्थिरता आई है।

सामाजिक वनिकी में वन्यजीव संरक्षण (Concept Section)

सामाजिक वनिकी वह दृष्टिकोण है जहाँ स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी समाजों की भागीदारी से वन और वन्यजीवों का संरक्षण किया जाता है। यह संरक्षण का स्थानीय प्रबंधन है जो वन पर निर्भर समुदायों की आजीविका और जंगल के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।

यह तरीका वन संरक्षण अधीन अधिक साझेदारी एवं सहयोग को प्रोत्साहित करता है और अवैध उपयोग को कम करता है। यह सामाजिक वनिकी, वन नीति और स्थानीय हितधारकों के सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकता।

मूल लाभ: स्थानीय समुदायों का संरक्षण में संवैधानिक प्रवेश, वन प्रबंधन में स्थिरता और सांस्कृतिक-सामाजिक संरक्षण। यह दृष्टिकोण आगामी अध्याय सामाजिक वानिकी में विस्तार से आया है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रमुख कानूनी और अंतरराष्ट्रीय पहल का सारांश

Key Concept

वन्यजीव संरक्षण रणनीतियाँ एवं कानूनी पहल

भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए अंतःस्थलीय बचाव, बहिःस्थलीय संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, और अंतरराष्ट्रीय संधियाँ मुख्य आधार हैं।

WORKED EXAMPLES: वन्यजीव संरक्षण के व्यावहारिक प्रश्न

Example 4: राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य में अंतर Easy
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
1) राष्ट्रीय उद्यान में मानव क्रियाएँ नियंत्रित होती हैं, अभयारण्य में पूरी तरह निषेध होती हैं।
2) अभयारण्य में वन्यजीवों को अधिक स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
3) दोनों में वन्यजीवों की सुरक्षा समान होती है।
4) राष्ट्रीय उद्यान में कृषि और वास की अनुमति दी जाती है।

Step 1: राष्ट्रीय उद्यान में मानव गतिविधियाँ लगभग निषिद्ध होती हैं, पूर्ण संरक्षण का क्षेत्र होता है।

Step 2: अभयारण्य में सीमित मानव गतिविधियाँ, जैसे संग्रहण या चराई, संभावित होती हैं।

Step 3: इसलिए कथन 2 सही है कि अभयारण्य में वन्यजीवों को अधिक स्वतंत्रता मिलती है।

Answer: विकल्प 2 सही है।

Example 5: CITES समझौते का उद्देश्य Easy
CITES का उद्देश्य क्या है? निम्न में से कौन-सा सही है?
1) वन्यजीव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कानून बनाना
2) अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार को नियंत्रित करना
3) केवल वन्यजीव अधिनियम का आधुनिकीकरण
4) जैव विविधता संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाना

Step 1: CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीवों और वनस्पतियों के व्यापार को नियंत्रित करता है।

Step 2: यह अपनी सदस्य देशों के बीच अवैध व्यापार को रोकने और प्रजातियों को संकट से बचाने के लिए नियम बनाता है।

Answer: विकल्प 2 सही है। अन्य विकल्प या तो राष्ट्रीय स्तर के हैं या व्यापक जैव विविधता पर केंद्रित।

Tips & Tricks

Tip: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के शेड्यूल (schedules) को प्रजाति वर्गों में बांट कर याद करें।

When to use: कानून संबंधी सीधे तथ्य आधारित प्रश्नों के लिए।

Tip: राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य की प्रक्रिया को फ्लोचार्ट के रूप में समझना सरल होता है।

When to use: प्रशासकीय/कानूनी प्रश्नों के लिए।

Tip: प्रश्नों में दिए गए जीवों के संरक्षण स्तर और आवास को जोड़कर गलत विकल्पों को बाहर करें।

When to use: जीव-जंतु आधारित वन्यजीव संरक्षण प्रश्नों में।

Tip: अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संरक्षण कानूनों के बीच फर्क स्पष्ट रखें।

When to use: बहुविकल्पीय प्रश्नों में भ्रम से बचने के लिए।

Common Mistakes to Avoid

❌ species conservation को ecosystem conservation के समान समझना
✓ species conservation विशिष्ट प्रजाति पर केंद्रित होता है, ecosystem conservation पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर। (देखें: जैव विविधता)
प्रश्न अक्सर दोनों को मिलाकर पूछते हैं, स्पष्ट ज्ञान से भटकाव टला जा सकता है।
❌ सभी संरक्षित क्षेत्रों को राष्ट्रीय उद्यान समझना
✓ राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बायोस्फीयर रिज़र्व अलग-अलग कानूनी एवं संरक्षण स्तरों पर काम करते हैं।
अलग-अलग संरक्षित क्षेत्रों की विशिष्टता समझने से प्रश्नों में सही विकल्प चुनने में सहायता मिलती है।
❌ अंतरराष्ट्रीय संधि CITES को भारत की राष्ट्रीय नीति समझना
✓ CITES एक वैश्विक समझौता है, जबकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम राष्ट्रीय कानून है।
दोनों में नियम और प्रभाव क्षेत्र भिन्न होता है; गलत विकल्प से बचने की कुंजी।
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