जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ है पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों-पौधों, जानवरों, सूक्ष्मजीवों-की विविधता। इसमें तीन स्तर शामिल होते हैं: आनुवंशिक विविधता (genetic diversity), प्रजातिगत विविधता (species diversity), और पारिस्थितिकी तंत्र विविधता (ecosystem diversity)।
इस शब्द का पहला व्यापक प्रयोग अमेरिकी जीव विज्ञानी E.O. Wilson ने 1980 के दशक में किया। उन्होंने जैव विविधता को "जीवों की विविधता का कुल योग" बताया।
जैव विविधता मानव जीवन के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है, जैसे भोजन, औषधि, और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता। यह पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं जैसे स्वच्छ जल, हवा और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है।
आइए अब तीन स्तरों को विस्तार से समझें, क्योंकि ये एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं पर भिन्न भूमिकाएँ निभाते हैं।
आनुवंशिक विविधता मतलब किसी प्रजाति के अंदर जीवों में पाए जाने वाले जीनों या वंशाणु भिन्नता। जैसे मनुष्यों की अलग-अलग ऊँचाई, रंग, रोग प्रतिरोधक क्षमता। यह विविधता उस प्रजाति के जीवों की अनुकूलन शक्ति को बढ़ाती है।
प्रजातिगत विविधता किसी क्षेत्र में रहने वाली विभिन्न जीव प्रजातियों की संख्या और उनकी विविधता को कहते हैं। उदाहरण के लिए, एक वन में पेड़, पक्षी, कीड़े, और जानवर सभी अलग-अलग प्रजातियाँ होती हैं।
यह विविधता पृथ्वी के विभिन्न प्रकार के निवास स्थानों या पारिस्थितिकी तंत्रों का प्रतिनिधित्व करती है-जैसे जंगल, झील, मरुस्थल, और महासागरीय क्षेत्र। हर पारिस्थितिकी तंत्र में विशिष्ट जीव-जंतु और पारिस्थितिक प्रक्रियाएँ होती हैं।
जैव विविधता न केवल प्राकृतिक जीवन का आधार है, बल्कि मानव समाज के लिए भी अनेकों लाभ प्रदान करती है।
जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन और स्थिरता को बनाये रखती है। जैसे कि एक वन में पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और जानवर भोजन श्रृंखला में अपनी भूमिका निभाते हैं।
कई जीव संसाधन जैसे औषधियाँ, फल, लकड़ी, और कपास मानव जीवन के लिए आवश्यक हैं। जैव विविधता की कमी से इन संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, भारत की कई दवाइयाँ प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होती हैं।
जैव विविधता विभिन्न संस्कृतियों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और विश्वासों का एक हिस्सा होती है। बहुत से समुदायों की जीवन शैली सीधे वन और प्रकृति से जुड़ी होती है।
जैव विविधता पर कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं, जो इसकी स्थिरता और जीवित रहने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
| खतरा | कारण | प्रभाव |
|---|---|---|
| आवास विनाश | वनों की कटाई, शहरीकरण, कृषि विस्तार | प्रजनन स्थल और भोजन स्रोतों की कमी से प्रजातियों की संख्या में कमी |
| अवैध शिकार एवं तस्करी | मूल्यवान जीवों का शिकार जैसे हाथी का दांत, बाघ की खाल | प्रजातियों का विलुप्त होना, जैव विविधता का नुकसान |
| प्रदूषण | रासायनिक, जल और वायु प्रदूषण | जीवों की जीवन क्षमता में कमी, विषाक्तता |
| प्रवासी प्रजातियाँ (Invasive Species) | मनुष्यों द्वारा अनजाने में लाया गया विदेशी जीव | स्थानीय प्रजातियों का प्रतिस्पर्धा में रहना मुश्किल |
| जलवायु परिवर्तन | मानव क्रियाओं से गर्मी बढ़ना, मौसम में बदलाव | प्रजातियों का आवास स्थान बदलना, विलुप्ति का खतरा |
जैव विविधता को बचाने के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के संरक्षण उपाय अपनाए जाते हैं:
graph TD A[संरक्षण के उपाय] A --> B[स्थल-स्थ संरक्षण (In situ)] A --> C[स्थल-बाह्य संरक्षण (Ex situ)] B --> B1[राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य] B --> B2[वन अधिनियम, वन नीति] C --> C1[बोटैनिकल गार्डन, जूलॉजिकल पार्क] C --> C2[बीज बैंक, जैव प्रजनन केंद्र] A --> D[सामुदायिक भागीदारी] D --> D1[स्थानीय जनजागृति] D --> D2[वन्यजीव संरक्षण अभियानों में सहभागिता]
स्थल-स्थ संरक्षण (In situ conservation) में जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित किया जाता है। जैसे राष्ट्रीय उद्यान, जैव विविधता अभयारण्य। भारत में यह तरीका वन अधिनियम (1927) और वन नीति के तहत समर्थित है।
स्थल-बाह्य संरक्षण (Ex situ conservation) में जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर किसी नियंत्रित वातावरण में रखा जाता है, जैसे बोटैनिकल गार्डन, जूलॉजिकल पार्क। यह दुर्लभ और संकटापन्न प्रजातियों के लिए उपयोगी है।
सामुदायिक भागीदारी से स्थानीय समुदाय जैव विविधता संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों के उपयोग में विशेषज्ञ होते हैं।
Step 1: आनुवंशिक विविधता का अर्थ है एक प्रजाति के अंदर जीनों में परिवर्तन।
Step 2: विकल्प (B) "एक प्रजाति के अंदर रंग और आकार में भिन्नता" आनुवंशिक विविधता का सही उदाहरण है।
Step 3: अन्य विकल्प - (A) और (C) प्रजातिगत और पारिस्थितिकी तंत्र विविधता से संबंधित हैं, (D) पारिस्थितिकी तंत्र के स्तर पर विविधता का विस्तार है।
Answer: विकल्प (B)
Step 1: एक जैव विविधता हॉटस्पॉट के लिए दो आवश्यक मापदंड होते हैं: कम से कम 1500 एंडेमिक प्रजातियाँ होना और आवास क्षेत्र में कम से कम 70% का विनाश।
Step 2: यहाँ कुल पौधों की संख्या है 1500+, परंतु एंडेमिक पौधों की संख्या 700 है, जो 1500 से कम है।
Step 3: मानव गतिविधि के कारण आवास विनाश हो रहा है, परंतु एंडेमिक प्रजाति की संख्या कम होने से यह क्षेत्र हॉटस्पॉट के मानक पर पूर्णतः खरा नहीं उतरता।
Answer: यह क्षेत्र जैव विविधता हॉटस्पॉट नहीं माना जाएगा क्योंकि एंडेमिक प्रजातियों की संख्या न्यूनतम मानक से कम है, जबकि आवास विनाश उच्च है।
नोट: फर्श के रूप में एक क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए दोनों मापदंड आवश्यक हैं।
Step 1: समस्या अद्यतन (Invasive species) से स्थानीय प्रजातियाँ खतरे में हैं।
Step 2: स्थान-स्थ (In situ) संरक्षण जैसे संरक्षित क्षेत्र बनाना या जल निकाय की निगरानी बढ़ाना।
Step 3: साथ ही, ex situ तरीकों द्वारा स्थानीय प्रजातियों को संरक्षित करना भी जरूरी हो सकता है।
Answer: In situ संरक्षण उपाय-जल निकाय की मॉनिटरिंग और नियंत्रण के साथ ex situ संरक्षण-दुर्लभ प्रजातियों के लिए उपयोगी।
Step 1: वन अधिनियम (1927) के तहत वन सुरक्षा तथा अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।
Step 2: राष्ट्रीय उद्यान एवं संरक्षित क्षेत्र बनाया जाए जहां इन प्रजातियों को सुरक्षित आवास मिले (In situ conservation)।
Step 3: सामाजिक वानिकी (Local community involvement) के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण में स्थानीय लोगों को शामिल करना।
Step 4: तस्करी के लिये कड़ी सजाएँ और संवेदनशील क्षेत्रों में मॉनिटरिंग बढ़ाना।
Answer: वन अधिनियम लागू करना, राष्ट्रीय उद्यान बनाना, एवं सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना।
Step 1: जानें कि पारिस्थितिकी तंत्र विविधता में आवास या निवास स्थानों का भिन्न प्रकार शामिल होता है।
Step 2: विकल्प (C) में विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र - जंगल, मैदान, झील - का उदाहरण है।
Step 3: (A) आनुवंशिक विविधता, (B) प्रजातिगत विविधता, (D) भी आनुवंशिक विविधता से संबंधित हैं।
Answer: विकल्प (C)
When to use: जब जैव विविधता के स्तरों के बारे में पूछा जाए।
When to use: खतरे और संरक्षण पर आधारित सवालों के लिए।
When to use: बहुविकल्पी प्रश्नों में गलत विकल्प निकालने के लिए।
When to use: संरक्षण से जुड़े सवालों को स्पष्ट करने के लिए।
When to use: नीति एवं संरक्षण आधारित सवालों में।
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