👁 Preview — Study, Practice and Revise are open; mock tests and the rest of the syllabus unlock on subscription. Unlock all · ₹4,999
← Back to वन एवं पर्यावरण
Study mode

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन: परिचय

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का अर्थ है पृथ्वी के दीर्घकालिक जलवायु प्रणाली में होने वाले महत्वपूर्ण और सतत परिवर्तन। इसमें तापमान, वर्षा, हवा की दिशा और तीव्रता जैसे तत्व शामिल होते हैं। यह परिवर्तन प्राकृतिक प्रक्रियाओं और मानव गतिविधियों दोनों के कारण हो सकता है।

महत्त्व: जलवायु परिवर्तन से पारिस्थितिकी तंत्र, मानव जीवन, कृषि, जल-संसाधनों और जैव विविधता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसे समझना और नियंत्रित करना पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect)

ग्रीनहाउस प्रभाव वह प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके कारण पृथ्वी का तापमान जीवन के लिए उपयुक्त बना रहता है। सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आती हैं और पृथ्वी गर्म होती है। कुछ गर्मी वापस अंतरिक्ष में उत्सर्जित होती है, लेकिन ग्रीनहाउस गैसें (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन) इस गर्मी को फ़ंसा लेती हैं, जिससे पृथ्वी की सतह गरम रहती है।

पृथ्वी की सतह ग्रीनहाउस गैसें सूर्य से ऊर्जा वापस उत्सर्जित ऊर्जा (कुछ फँसी)

क्यों महत्वपूर्ण? यदि ग्रीनहाउस गैसें न होतीं, तो पृथ्वी की औसत तापमान लगभग -18°C होती, जिससे जीवन असंभव था। तथापि, मानव गतिविधियों के कारण इन गैसों की मात्रा बढ़ कर वह संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे अत्यधिक वैश्विक तापमान वृद्धि हो रही है।

जलवायु परिवर्तन के कारण

  • प्राकृतिक कारण: वायुमंडलीय घटनाएं जैसे सूरज की सक्रियता में परिवर्तन, ज्वालामुखी गतिविधि, और पृथ्वी की कक्षा और अक्षीय झुकाव में बदलाव।
  • मानवनिर्मित कारण: जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, तेल और गैस का दहन, वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण और कृषि गतिविधियाँ।
  • ग्रीनहाउस गैसें: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), और फ्लोरोक्लोरोकार्बन्स (F-CFCs)।
  • CO2 सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, लेकिन CH4 की जलवायु पर प्रभाव प्रति इकाई अधिक होता है।
  • वनों की कटाई से कार्बन संग्रहन कम हो जाता है, इसलिए वन संरक्षण भारत की वन नीति से जुड़ा हुआ विषय है।

वैश्विक तापमान में वृद्धि (Global Temperature Rise)

1970 से लेकर अब तक वैश्विक तापमान में लगभग 1°C से अधिक की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। इस बढ़ोतरी का आधार जलवायु परिवर्तन में निहित है। तापमान वृद्धि के कारण समुद्र का जल स्तर बढ़ता है, ग्लेशियर पिघलते हैं, और मौसम में असामान्य पैटर्न बनते हैं।

1970 से 2020 तक वैश्विक तापमान में वृद्धि (औसत)
वर्षऔसत वैश्विक तापमान वृद्धि (°C)
19700.0
19800.15
19900.35
20000.55
20100.75
20201.02

क्यों समझना आवश्यक? तापमान वृद्धि का ज्ञान हमें प्रभावी नीतियां बनाने और जलवायु आपदाओं से बचाव के उपाय अपनाने में मदद करता है। यह विषय 'वन नीति' और 'जैव विविधता' जैसे उपविषयों से सीधे जुड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और समझौते

जलवायु परिवर्तन के वैश्विक संकट से निपटने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय समझौते हुए हैं, जिनमें कुछ मुख्य हैं:

  • क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol): 1997 में स्थापित, इसमें विकसित देशों को अपने प्रदूषण कम करने का लक्ष्य दिया गया। यह पहली बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधि थी।
  • पेरिस समझौता (Paris Agreement): 2015 में हुआ और इसका लक्ष्य ग्लोबल वार्मिंग को 2°C से कम और संभव हो तो 1.5°C तक सीमित करना है। इसमें सभी देशों को योगदान देने के लिए कहा गया है।
  • भारत की भूमिका: भारत ने भी पेरिस समझौते के अंतर्गत उत्सर्जन कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।
graph TD  KP[क्योटो प्रोटोकॉल (1997)] --> PA[पेरिस समझौता (2015)]  PA --> India[भारत की प्रतिबद्धताएं]  KP -->|ब्रॉड लक्ष्य| Developed[विकसित देश]  PA -->|सभी देशों के लिए| All[सभी देश]  India -->|स्वच्छ ऊर्जा|Renewable[नवीकरणीय ऊर्जा]

जलवायु परिवर्तन के निवारण और अनुकूलन उपाय

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने या उससे अनुकूलित करने के लिए निम्न उपाय अपनाए जाते हैं:

  • वन संरक्षण और वनीकरण: वनों से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित होती है, इसलिए 'वन प्रबंधन' और 'सामाजिक वानिकी' के तहत वनों की सुरक्षा और पुनरुद्धार महत्वपूर्ण है।
  • कार्बन फुटप्रिंट कम करना: हर व्यक्ति, उद्योग या संगठन द्वारा उत्सर्जित कुल ग्रीनहाउस गैसों को कार्बन फुटप्रिंट कहते हैं। इसे कम करना हमें जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करता है।
  • स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा: कोयला और पेट्रोलियम की जगह सौर, पवन, और जल ऊर्जा का प्रयोग बढ़ाना जरूरी है।

कार्बन फुटप्रिंट गणना

\[C = \sum_{i=1}^n E_i \times F_i\]

कुल कार्बन उत्सर्जन (C) की गणना के लिए, प्रत्येक गतिविधि (i) के उत्सर्जन मात्रा (E_i) को उसके उत्सर्जन कारक (F_i) से गुणा करें और सभी को जोड़ें।

C = कुल कार्बन फुटप्रिंट
\(E_i\) = iवीं गतिविधि से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैस की मात्रा
\(F_i\) = iवीं गतिविधि का उत्सर्जन कारक

WORKED EXAMPLES

Example 1: कर्बन फुटप्रिंट का गणना Medium
आपके घर से तीन गतिविधियाँ CO2 उत्सर्जित करती हैं: विद्युत उपयोग (E1 = 100 यूनिट), पेट्रोल उपयोग (E2 = 50 लीटर), और लकड़ी जलाना (E3 = 30 किलो)। उनके उत्सर्जन कारक क्रमशः F1=0.5, F2=2.3, F3=1.8 हैं। कुल कार्बन फुटप्रिंट ज्ञात करें।

Step 1: कुल कार्बन फुटप्रिंट के सूत्र का उपयोग करें:

\( C = \sum_{i=1}^3 E_i \times F_i = E_1 \times F_1 + E_2 \times F_2 + E_3 \times F_3 \)

Step 2: मान डालें:

\( C = 100 \times 0.5 + 50 \times 2.3 + 30 \times 1.8 = 50 + 115 + 54 = 219 \)

Answer: कुल कार्बन फुटप्रिंट 219 इकाइयाँ है।

Example 2: ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव Easy
निम्न में से कौन-सी गैसें सबसे अधिक वैश्विक ताप बढ़ाने में योगदान देती हैं और क्यों?
(a) ऑक्सीजन (O2)
(b) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
(c) नाइट्रोजन (N2)
(d) हीलियम (He)

Step 1: देखें कि कौन-सी गैसें ग्रीनहाउस गैस हैं।

ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और हीलियम ग्रीनहाउस गैस नहीं हैं।

CO2 प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है क्योंकि यह गर्मी को अवशोषित करती है।

Answer: विकल्प (b) कार्बन डाइऑक्साइड सही है। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा नहीं करते।

Example 3: वैश्विक तापमान वृद्धि के परिणाम Medium
ग्लोबल वार्मिंग के कारण कौन-से पर्यावरणीय परिवर्तन होते हैं? सही कथन चुनिए।
(a) ग्लेशियर का पिघलना
(b) समुद्र के स्तर में गिरावट
(c) मौसम पैटर्न में बदलाव
(d) वनों की वृद्धि

Step 1: ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर पिघलते हैं। इसलिए (a) सही है।

(b) गलत है: समुद्र स्तर में वृद्धि होती है, गिरावट नहीं।

(c) सही है: तापमान और वर्षा पैटर्न में बदलाव होता है।

(d) गलत है: वन स्तर सामान्यतः घटता है।

Answer: (a) और (c) सही हैं।

Example 4: क्योटो प्रोटोकॉल की विशेषता Easy
क्योटो प्रोटोकॉल के बारे में सही कथन चुनिए:
(a) यह केवल विकासशील देशों के लिए बाध्यकारी था।
(b) इसमें विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य दिए गए।
(c) इसे 2015 में अपनाया गया।
(d) भारत इसका अनुबंधकर्ता देश नहीं है।

Step 1: क्योटो प्रोटोकॉल 1997 में विकसित हुआ।

यह मुख्यतः विकसित देशों के लिए बाध्यकारी था, इसलिए (a) गलत।

(b) सही है।

(c) गलत, 2015 में पेरिस समझौता हुआ।

(d) गलत, भारत भी इस समझौते का हिस्सा है।

Answer: (b) सही है।

Example 5: वन संरक्षण द्वारा जलवायु परिवर्तन नियंत्रण Medium
वन संरक्षण जलवायु परिवर्तन के नियंत्रण में कैसे मदद करता है? मुख्य कारण समझाइए।

Step 1: वन कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण से कम करते हैं।

यह ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को कम करता है, जिससे तापमान वृद्धि धीमी होती है।

Answer: वन संरक्षण से वातावरण में कार्बन की मात्रा नियंत्रित रहती है, जिससे जलवायु परिवर्तन की गति कम होती है।

Tips & Tricks

Tip: ग्रीनहाउस गैसों को याद रखने के लिए फॉर्मूला 'F O C F' (Fluorine, Oxygen, Carbon, Fluorocarbons) mnemonic का प्रयोग करें।

When to use: जब ग्रीनहाउस गैसों की सूची याद करनी हो।

Tip: वैश्विक तापमान में वृद्धि के आँकड़े ध्यान से पढ़ें; अक्सर प्रश्न में वर्ष और वृद्धि दर्ज की जाती है।

When to use: तापमान वृद्धि से जुड़े प्रश्नों में समय बचाने के लिए।

Tip: क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता को उनकी वर्ष और मुख्य विशेषताओं से पहचानें।

When to use: बहुविकल्पीय परीक्षा में अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों के प्रश्नों में।

Tip: कार्बन फुटप्रिंट का सवाल आते ही इसे घटकों के उत्सर्जन गुणांक से गुणा करके जोड़ने की प्रक्रिया याद रखें।

When to use: पर्यावरणीय गणना और प्रदूषण आंकलन के प्रश्नों में।

Common Mistakes to Avoid

❌ जलवायु परिवर्तन में केवल प्राकृतिक कारणों को मान लेना।
✓ जलवायु परिवर्तन के लिए मानव गतिविधियां जैसे जीवाश्म ईंधन जलाना भी मुख्य कारण हैं।
मानव गतिविधियों ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ाकर समस्या को तीव्र किया है।
❌ यह समझना कि केवल CO2 ही ग्रीनहाउस गैस है।
✓ CH4, N2O, और F-CFCs भी प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें हैं।
CO2 तो सबसे सामान्य है, पर अन्य गैसों का प्रभाव प्रति इकाई अधिक होता है।
❌ अंतरराष्ट्रीय समझौतों को समान समझना।
✓ क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता के उद्देश्य और लागू देश भिन्न हैं।
इन समझौतों के लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं में अंतर होता है, प्रश्नों में भ्रम हो सकता है।
❌ वन संरक्षण को जलवायु परिवर्तन की समस्या से जोड़ना भूल जाना।
✓ वन संरक्षण ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण है।
वन कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं; इसे समझना जरूरी है।

मुख्य बिंदु

  • जलवायु परिवर्तन में प्राकृतिक और मानवनिर्मित दोनों कारण होते हैं।
  • ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को जीवन के लिए उपयुक्त तापमान प्रदान करता है।
  • मानव गतिविधियों से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसें वैश्विक तापमान बढ़ाती हैं।
  • क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता जलवायु संरक्षण के दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं।
  • वन संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा जलवायु परिवर्तन रोकने के प्रमुख उपाय हैं।
Key Takeaway:

जलवायु परिवर्तन सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिसे समझकर ही प्रभावी समाधान खोजे जा सकते हैं।

Curated videos per subtopic
Top YouTube explainers, AI-ranked for your exam and language. Unlocks with subscription.
Unlock

Try Practice next.

Progress tracking is paywalled — subscribe to mark subtopics as understood and save your streak.

Go to practice →
Ask a doubt
जलवायु परिवर्तन · 10 free messages
Ask me anything about this subtopic. You have 10 free messages this session — chat history isn't saved in preview.