बैंकिंग विनियमन का तात्पर्य बैंकिंग क्षेत्र को संरक्षित करने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने तथा ग्राहकों के हितों की रक्षा हेतु बनाए गए नियमों और कानूनों के समग्र सेट से है। विनियमन यह सुनिश्चित करता है कि बैंक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से संचालित हों। यह प्रणाली आर्थिक विकास में बैंकिंग व्यवस्था का विश्वास कायम रखती है और संकट की स्थिति में प्रणाली को बचाने का कार्य करती है।
बैंकिंग विनियमन का आधार प्रमुख रेगुलेटरी संस्थान हैं जो विभिन्न नीतियों और मानकों के माध्यम से बैंकिंग क्रियाकलापों की निगरानी करते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण Reserve Bank of India (RBI) है।
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India, RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है, जो बैंकिंग व्यवस्था का नियंत्रण करता है। RBI के प्रमुख कार्यों में मुद्रा प्रबंधन, बैंकिंग विनियमन, ऋण निर्धारण, और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना शामिल है। RBI द्वारा लागू किए गए कुछ प्रमुख नियामक उपाय इस प्रकार हैं:
| नीति | अर्थ | प्रभाव |
|---|---|---|
| रेपो दर (Repo Rate) | RBI द्वारा बैंकों को उपलब्ध कराई जाने वाली ऋण दर | बैंकिंग ऋण एवं महंगाई पर नियंत्रण |
| CRR | कुल जमा राशि का नगद अंश जो RBI के पास रखना होता है | मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करता है |
| SLR | कुल जमा राशि का वह हिस्सा जो सॉवरेन/securities में निवेशित होता है | बैंक की तरलता और सुरक्षित निवेश सुनिश्चित करता है |
बैंकिंग के अंतर्राष्ट्रीय नियामक संगठन Basel Committee on Banking Supervision द्वारा निर्धारित Basel मानक, बैंकिंग प्रणालियों के लिए जोखिम प्रबंधन के मानक स्थापित करते हैं। ये मानक मुख्यतः बैंक की पूंजीगत स्थिति को मजबूत करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।
Non-Performing Asset (NPA) वह ऋण होता है जिसकी किश्त या ब्याज 90 दिनों या उससे अधिक समय तक बैंक को प्राप्त नहीं हुई हो। जब कोई बैंक उधार दिया गया पैसा वापस नहीं पा पाता है, तो वह ऋण एनपीए घोषित हो जाता है। यह बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक गंभीर समस्या है क्योंकि इससे बैंक की आमदनी कम होती है और उसे घाटा उठाना पड़ता है।
एनपीए की प्रकार:
SARFAESI (Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest) अधिनियम, 2002 बैंकों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की वसूली के लिए शक्तियाँ प्रदान करता है। इसके तहत बैंक अपने कर्जदारों से बिना अदालत के संपत्ति जब्त कर उसे नीलाम कर कर्ज वसूल सकते हैं। यह अधिनियम दिवालियापन प्रक्रिया को त्वरित और प्रभावी बनाता है।
graph TD बैंक -->|कर्जदार का डिफॉल्ट| कर्जदार कर्जदार -->|लाभ/संपत्ति| बैंक बैंक -->|SARFAESI अधिनियम| कर्ज वसूली SARFAESI -->|संपत्ति जब्ती| नीलामी नीलामी -->|पैसे| बैंक
बैंकिंग गतिविधियों में डिजिटल तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। डिजिटल बैंकिंग, UPI (Unified Payments Interface) और NACH (National Automated Clearing House) जैसे तंत्र लोगों के लिए बैंकिंग को सरल, तेज़ और सुरक्षित बनाते हैं।
चरण 1: NPA की परिभाषा के अनुसार, वह ऋण जिसे 90 दिनों या उससे अधिक समय तक पुनर्भुगतान ना किया गया हो, NPA माना जाता है।
चरण 2: यहां 120 दिन का मूल्यांकन दिया गया है, जो कि 90 दिनों से अधिक है। अतः यह ऋण NPA के अंतर्गत आता है।
चरण 3: 120 दिन डिफॉल्ट होने पर यह ऋण "संदेहास्पद (Sub-standard)" श्रेणी में आयेगा यदि यह 12 महीनों से कम समय के लिए डिफॉल्ट में हो।
उत्तर: हाँ, यह ऋण NPA है और संभावित रूप से "संदेहास्पद" श्रेणी में आता है।
चरण 1: रेपो दर वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है।
चरण 2: यदि रेपो दर बढ़ती है, तो बैंक के लिए RBI से उधार लेना महंगा हो जाता है।
चरण 3: बैंक अपने ग्राहकों को भी उच्च ब्याज दर पर ऋण देंगे। इसका प्रभाव यह होगा कि ऋण लेना महंगा हो जाएगा और मुद्रा परिसंचरण में कमी आएगी।
उत्तर: ऋण लेना महंगा होगा जिससे मांग में कमी और महंगाई नियंत्रित हो सकती है, लेकिन आर्थिक विकास धीमा हो सकता है।
चरण 1: SARFAESI अधिनियम के अंतर्गत बैंक कर्जदार की जिम्मेदार संपत्ति जब्त कर सकती है, जिसमें अचल संपत्ति (जैसे जमीन, भवन) शामिल हैं।
चरण 2: बैंक सूचना भेजता है और कर्जदार को नोटिस दिया जाता है। यदि भुगतान नहीं होता है, तो संपत्ति की जब्ती की जाती है।
चरण 3: जब्त संपत्ति की नीलामी कर उससे प्राप्त धन राशि से बैंक अपना कर्ज वसूल करता है।
उत्तर: बैंक बिना अदालत के संपत्ति जब्त कर नीलामी के माध्यम से उसे बेचकर कर्ज वसूल करता है।
चरण 1: UPI (Unified Payments Interface) एक त्वरित डिजिटल भुगतान प्रणाली है जो विभिन्न बैंक खातों के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का माध्यम प्रदान करती है।
चरण 2: इसमें मोबाइल द्वारा भुगतान करना सरल, त्वरित और सुरक्षित होता है।
चरण 3: यह नकद रहित लेनदेन को बढ़ावा देता है जिससे बैंकिंग पहुँच और वित्तीय समावेशन में वृद्धि होती है।
उत्तर: UPI डिजिटल बैंकिंग में त्वरित, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध भुगतान का माध्यम है।
चरण 1: CRR की गणना सूत्र के अनुसार होती है:
चरण 2: यहाँ कुल जमा Rs.100 करोड़ और CRR 4% है।
चरण 3: RBI के पास रखा नकद = \(\frac{CRR \times कुल जमा}{100} = \frac{4 \times 100}{100} = Rs.4\) करोड़।
उत्तर: बैंक को Rs.4 करोड़ RBI के पास नकद के रूप में रखना होगा।
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