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NPA

परिचय

बैंकिंग क्षेत्र में NPA (Non-Performing Assets) का अर्थ गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ हैं, जो उन बकाया ऋणों को दर्शाती हैं जिनका ब्याज या मूलधन बैंक को समय पर प्राप्त नहीं होता। जब कोई उधारकर्ता तीन महीने से अधिक समय तक ब्याज या किस्त भुगतान नहीं करता, तो वह ऋण NPA कहलाता है। यह बैंकिंग क्षेत्र के वित्तीय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण सूचक है।

NPA की परिभाषा एवं वर्गीकरण

NPA क्या है?
NPA वह बैंक परिसंपत्ति (ऋण) होती है जिस पर कर्जदार की ओर से बैंक को ब्याज या मूलधन की अदायगी लंबित होती है और वह कम से कम 90 दिन के लिए डिफॉल्ट में होता है।

विभिन्न प्रकार के NPA

विभिन्न प्रकार के NPA और उनका वर्णन
प्रकार परिभाषा समयावधि
सबसटैंडर्ड (Substandard) 90 दिनों से ज्यादा लेकिन 12 महीनों से कम अवधि के लिए डिफॉल्ट में ऋण 90 दिन < अवधि < 12 महीने
डाउटफुल (Doubtful) 12 महीनों से अधिक समय के लिए डिफॉल्ट में ऋण, जिसमें वसूली की संभावना कम होती है > 12 महीने
लॉस (Loss Assets) ऐसे ऋण जिन्हें रिकवरी असंभव या बेहद कठिन माना जाता है आकलन के आधार पर

NPA की गणना

NPA अनुपात (%) ज्ञात करने के लिए नीचे दिया सूत्र प्रयुक्त होता है:

NPA प्रतिशत निकालन

\[\text{NPA \%} = \left(\frac{\text{कुल NPA राशि}}{\text{कुल लोन राशि}}\right) \times 100\]

यह प्रतिशत बताता है कि कुल लोन राशि में से कितना हिस्सा गैर-निष्पादित परिसंपत्ति बना हुआ है।

कुल NPA राशि = बैंक को लंबित ऋण एवं ब्याज की कुल राशि
कुल लोन राशि = संपूर्ण बैंक द्वारा दिया गया कुल ऋण

कारण एवं प्रभाव

NPA के मुख्य कारण

  • अतः पुनर्भुगतान क्षमता की कमी: कर्जदार की वित्तीय स्थिति कमजोर होने पर वह ऋण चुकाने में असमर्थ होता है।
  • बाधित व्यापार या परियोजना: व्यापार के असफल होने या परियोजना में विलंब के कारण नकदी प्रवाह रुक जाता है।
  • आर्थिक मंदी: समग्र बाजार की स्थिति खराब होने पर कई उद्योग प्रभावित होते हैं जिससे उधारदाताओं के भुगतान रुक सकते हैं।

बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव

NPA बढ़ने से बैंक की लाभप्रदता कम होती है। इसे समजें कि जब ऋण की अदायगी नहीं होती, तब बैंक को ऋण पर मिलने वाली ब्याज आय घट जाती है, जो उनकी आय को प्रभावित करता है। इससे बैंक की पूंजी कमज़ोर होती है और नए ऋण देने की क्षमता घटती है।

आर्थिक प्रभाव

उच्च NPA स्तर आर्थिक विकास में बाधा डालता है क्योंकि बैंकों की ऋण क्षमता कमजोर होने से उद्योग एवं व्यक्तियों को पूंजी उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है। इससे आर्थिक गतिविधि सुस्ती का सामना करती है।

नियामक एवं न्यायिक प्रावधान

RBI की NPA नीति

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, यदि कोई ऋण तीन महीने से ब्याज या किस्त भुगतान के लिए डिफॉल्ट में हो तो उसे NPA माना जाता है। RBI बैंकिंग संकट से निपटने हेतु समय-समय पर मार्गदर्शन जारी करता है, जैसे निगरानी सूची बनाना, पुनर्गठन कार्यक्रम और सावधानीपूर्वक वसूली प्रबंधन।

SARFAESI अधिनियम (2002)

Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest अधिनियम के तहत, बैंक बिना कोर्ट का सहारा लिए कर्जदार की धरोहर संपत्ति जब्त कर वसूल कर सकते हैं। यह अधिनियम NPA को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण उपाय है।

IBC (Insolvency and Bankruptcy Code)

IBC, 2016 एक एकीकृत कानून है, जो दिवालियापन व ऋण वसूली प्रक्रियाओं को सरल और त्वरित बनाता है। यह अधिनियम न केवल NPA के समाधान में सहायक है, बल्कि कर्जदारों व लेनदारों के हितों का संतुलन भी बनाता है।

NPA प्रबंधन तकनीकें

वसूली के उपाय

  • ऋण पुनर्गठन: कर्जदार की स्थिति के अनुसार ऋण की शर्तों में बदलाव (जैसे ब्याज दरों में कमी)।
  • ब्याज और प्रधान धन की वसूली: बैंक कर्ज की किश्तें समय पर प्राप्त करना सुनिश्चित करते हैं।
  • संपत्ति जब्ती: SARFAESI अधिनियम के तहत बंधक संपत्ति का कब्ज़ा।

बैंकिंग विनियम

RBI द्वारा स्थापित क्रेडिट ब्यूरो पर लगातार निगरानी रहनी चाहिए जिससे उधारदाताओं के डिफॉल्ट को समय रहते पहचाना जा सके। बैंक लेखांकन मानकों के तहत NPA का उचित वर्गीकरण भी जरूरी है।

बैंकिंग स्थिरता हेतु कदम

बैंक मजबूत जोखिम प्रबंधन और पूंजी संरचना के साथ काम करें ताकि वे वित्तीय अस्थिरता से निपट सकें। पैसों के बचाव और प्रवाह में निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है।

संबंधित बैंकिंग अवधारणाएँ

डिजिटल बैंकिंग

डिजिटल तकनीकों के माध्यम से बैंकिंग कार्यों को सरल व त्वरित बनाना NPA नियंत्रण में मददगार होता है क्योंकि इससे लेन-देन पारदर्शी और रिकॉर्ड सही रहता है।

UPI और NACH प्रणाली

भारतीय भुगतान प्रणाली के ये आधुनिक यंत्र तेजी से भुगतान और वसूली सुनिश्चित करते हैं, जिससे डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है।

बेसल मानक

बेसल III जैसे अंतरराष्ट्रीय मानक बैंक की पूंजी को सुदृढ़ करते हैं, तथा जोखिम आधारित पूंजी आवश्यकताएं निर्धारित करके बैंकिंग स्थिरता में योगदान देते हैं।

WORKED EXAMPLES

Example 1: NPA प्रतिशत की गणना Easy
एक बैंक ने कुल Rs.500 करोड़ के ऋण दिए हैं, जिनमें से Rs.25 करोड़ के ऋण तीन महीनों से अधिक अवधि के लिए भुगतान नहीं हुए हैं। बैंक के लिए NPA प्रतिशत ज्ञात करें।

Step 1: कुल NPA राशि = Rs.25 करोड़

Step 2: कुल ऋण राशि = Rs.500 करोड़

Step 3: फार्मूला लगाएं: \(\text{NPA \%} = \left(\frac{25}{500}\right) \times 100 = 5\%\)

Answer:इस बैंक का NPA प्रतिशत 5% है।

Example 2: SARFAESI अधिनियम का अवलोकन Medium
SARFAESI अधिनियम के अंतर्गत बैंक को किस प्रकार की शक्तियां प्राप्त होती हैं? एक संक्षिप्त उदाहरण दें।

Step 1: यह अधिनियम बैंकों को कोर्ट की अनुमति के बिना सुरक्षा ब्याज की संपत्ति ज़ब्त करने की शक्ति देता है।

Step 2: यदि कोई कर्जदार ऋण वापस नहीं करता है, तो बैंक बैंक संपत्ति को नीलामी के लिए रख सकता है।

Step 3: उदाहरण के लिए, अगर एक व्यवसाय ने Rs.10 करोड़ कर्ज लिया है और लोन चुकाने में असमर्थ है, तो बैंक अपने अधिकारों के तहत उस व्यवसाय की मशीनरी बेच सकता है।

Answer: SARFAESI अधिनियम तेजी से ऋण वसूली में मदद करता है, जिससे NPA को कम किया जा सकता है।

Example 3: IBC प्रक्रिया की समझ Hard
IBC के अंतर्गत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के मुख्य चरणों का सारांश प्रस्तुत करें।

Step 1: आवेदन दायर करना: लेनदार या कर्जदार IBC अंतर्गत दिवालियापन के लिए आवेदन करते हैं।

Step 2: समाधान प्रक्रिया प्रारंभ: न्यायालय द्वारा समाधान प्रक्रिया शुरू की जाती है, जिसमें निगम प्रबंधन बाधित रहता है।

Step 3: ऋण पुनर्गठन या परिसंपत्ति बिक्री: कर्ज की वसूली के लिए पुनर्गठन या कंपनी परिसंपत्ति की नीलामी होती है।

Answer: IBC एक प्रभावी व्यवस्था है जो NPA के सतत समाधान और वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करती है।

Example 4: NPA के कारण और प्रभाव (प्रवेश परीक्षा) Easy
निम्नलिखित में से कौन NPA के कारण नहीं है?
(a) आर्थिक मंदी
(b) उचित ऋण जांच
(c) व्यापार विफलता
(d) नकदी प्रवाह में बाधा

Step 1: आर्थिक मंदी, व्यापार विफलता और नकदी प्रवाह बाधा NPA के मुख्य कारण हैं।

Step 2: उचित ऋण जांच NPA को रोकने में सहायक है, इसलिए यह कारण नहीं हो सकता।

Answer: सही विकल्प है (b) उचित ऋण जांच।

Example 5: RBI NPA नीति की विशेषताएँ (प्रवेश परीक्षा) Medium
RBI की NPA नीति में कौन-कौन से उपाय शामिल हैं?
(a) निगरानी सूची बनाना
(b) ब्याज दरों को स्थिर रखना
(c) पुनर्गठन योजना लागू करना
(d) सभी विकल्प सही हैं

Step 1: RBI NPA को नियंत्रित करने के लिए निगरानी सूची बनाता है।

Step 2: RBI ब्याज दरों को स्थिर रखने की नीति नहीं अपनाता है, यह बाजार पर निर्भर होता है।

Step 3: RBI पुनर्गठन योजनाओं पर भी मार्गदर्शन करता है।

Answer: सही विकल्प है (c) पुनर्गठन योजना लागू करना। (a) भी सही है, लेकिन (d) गलत है क्योंकि (b) गलत है।

Tips & Tricks

Tip: NPA प्रतिशत प्रश्न हल करते समय कुल बैंक लोन और कुल NPA राशि पर विशेष ध्यान दें।

When to use: जब बैंक के कुल ऋण और NPA राशि का अनुपात निकालना हो।

Tip: SARFAESI अधिनियम की प्रक्रिया को याद रखने के लिए flowchart या चरणवार सूची बनाएं।

When to use: विधिक प्रावधानों से जुड़े तात्कालिक सवालों के लिए।

Tip: IBC की प्रभावशीलता और उद्देश्य याद रखने के लिए उसके तीन मुख्य चरणों को क्रम में याद करें - आवेदन, समाधान प्रक्रिया, पुनर्गठन या नीलामी।

When to use: जब दिवालियापन कानून से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाएँ।

Tip: NPA के वर्गीकरण (सबसटैंडर्ड, डाउटफुल, लॉस) को याद रखने के लिए इनके समयावधि पर ध्यान दें।

When to use: पारिभाषिक और अवधारणात्मक प्रश्नों में।

Tip: RBI की NPA नीति और RBI द्वारा दिए गए निर्देशों का साल-दर-साल अवलोकन करते रहें ताकि नवीनतम नियम समझ में आएं।

When to use: नीति संबंधी और आधुनिक प्रश्न तैयारी के लिए।

Common Mistakes to Avoid

❌ NPA की परिभाषा में 90 दिनों की सीमा गलत समझना या याद न रखना।
✓ NPA केवल तब माने जाते हैं जब भुगतान 90 दिनों से अधिक लंबित हो।
Why: 90 दिनों की सीमा RBI द्वारा निर्धारित है और इसे भूलने पर NPA से जुड़े प्रश्न गलत उत्तर हो सकते हैं।
❌ SARFAESI अधिनियम को कोर्ट की अनुमति वाले कानून समझना।
✓ SARFAESI अधिनियम के तहत बैंक बिना कोर्ट के हस्तक्षेप के संपत्ति जब्त कर सकते हैं।
Why: अधिनियम तभी प्रभावी होता है जब बैंक सीधे कार्रवाई कर सके, इसलिए कोर्ट की अनुमति अनिवार्य नहीं है।
❌ IBC प्रक्रिया को केवल दिवालियापन के लिए सीमित समझना और इसके व्यापक प्रभाव को न समझना।
✓ IBC न केवल दिवालियापन बल्कि ऋण वसूली और पुनर्गठन के लिए भी है।
Why: IBC का उद्देश्य वित्तीय स्थिरता और कर्ज़दाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

NPA से सम्बंधित मुख्य बिंदु

  • NPA वह ऋण है जो 90 दिनों से अधिक भुगतान के लिए विलंबित होता है।
  • NPA के तीन प्रकार होते हैं: Substandard, Doubtful, Loss।
  • RBI द्वारा NPA प्रबंधन हेतु नीतियाँ जारी की जाती हैं।
  • SARFAESI अधिनियम और IBC NPA को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
  • NPA का उच्च स्तर बैंक तथा अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम है।
Key Takeaway:

NPA की सही समझ और नियंत्रण बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता एवं विकास के लिए अनिवार्य है।

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