बेसल संधि (Basel Accord) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को सुदृढ़ एवं सुरक्षित बनाना है। इसे बैंकिंग विनियमन के एक रूप में विकसित किया गया ताकि बैंक अपनी पूंजी पर्याप्तता बनाये रखें और जोखिम प्रबंधन को बेहतर तरीके से लागू करें। यह संधि 1988 में बेसल, स्विट्जरलैंड में स्थापित बेसल समिति द्वारा बनाई गई।
परिचय: 1970 और 1980 के दशक में विश्व के कई बड़े बैंकिंग संकटों से यह स्पष्ट हुआ कि बैंकिंग संस्थानों को जोखिम प्रबंधन के लिए सुसंगठित ढांचे की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता के तहत, 1988 में बेसल समिति ने पूंजी पर्याप्तता और जोखिम नियंत्रण मानकों का निर्धारण किया।
इतिहास: बेसल समिति की स्थापना 1974 में हुई थी, जो विश्व के केंद्रीय बैंक गवर्नरों का समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए विनियामक ढांचा विकसित करना है। बेसल I संधि के बाद बेसल II और III के रूप में इसे विकसित किया गया, ताकि नये प्रकार के जोखिमों को भी शामिल किया जा सके।
कैपिटल एडेक्वेसी अनुपात (CAR) बैंक के स्वयं के पूंजी और जोखिम-भारित संपत्तियों (Risk Weighted Assets - RWA) के अनुपात को दर्शाता है। यह अनुपात बैंकिंग प्रणाली में पूंजी की पर्याप्तता एवं स्थिरता का संकेत देता है।
कैपिटल के प्रकार:
Risk Weighted Assets (RWA) वे संपत्तियाँ हैं, जिनका जोखिम बैंकिंग दृष्टिकोण से मापा जाता है। अलग अलग संपत्तियों को भिन्न-भिन्न जोखिम भार दिया जाता है ताकि जोखिम के अनुसार पूंजी आवश्यकताओं की गणना हो सके।
महत्व: CAR इस बात का मानक है कि बैंक अपने संभावित जोखिमों के सामना करने के लिए कितनी पूंजी सुरक्षित रखता है। RBI और अन्य नियामक संस्थान इसे बैंक स्वास्थ्य मूल्यांकन का मुख्य मापदंड मानते हैं।
| घटक | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| Tier 1 Capital | उच्च गुणवत्ता वाली पूंजी जिसमें शेयर पूंजी एवं आरक्षित शामिल हैं। | इक्विटी शेयर, रिजर्व फंड |
| Tier 2 Capital | विकल्प पूंजी जिसमें उपकृत ऋण आदि आते हैं। | सुपोर्डिनेटेड कर्ज, पुनःमूल्यांकन कोष |
| Risk Weighted Assets (RWA) | जोखिम के आधार पर विभिन्न संपत्तियों का भारित मूल्य। | सिक्योर लोन का 20% जोखिम, बिना सुरक्षा के लोन का 100% जोखिम आदि। |
बेसल संधि के विकास में तीन प्रमुख चरण हैं, जो बैंकिंग उद्योग की जटिलताओं और जोखिम प्रबंधन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गये।
| संधि | मुख्य विशेषताएँ | सीमाएँ |
|---|---|---|
| बेसल I | पूंजी पर्याप्तता (CAR) को मंजूरी, केवल क्रोडिट रिस्क पर ध्यान | मार्केट और ऑपरेशनल रिस्क को शामिल न करना |
| बेसल II | क्रेडिट, मार्केट और ऑपरेशनल रिस्क के लिए मापदंड; अंतर्निहित जोखिम प्रबंधन वैश्विक मानक | व्यवसाय मॉडल पर अपेक्षित पूंजी की उपेक्षा |
| बेसल III | पूंजी गठन में गुणवत्ता वृद्धि, लीवरेज अनुपात, लिक्विडिटी मानक, तनाव परीक्षण | लागत अधिक, विशेष रूप से थोक वित्त में |
बेसल संधि के नियमों का पालन करने से बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता विश्वास बढ़ता है। यह संकट की स्थिति में बैंक की सहनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है और समग्र आर्थिक प्रणाली को सुरक्षित बनाता है।
भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में RBI ने बेसल III मानकों को अपनाया है, जिससे भारत के बैंक अधिक सक्षम और जोखिम प्रबंधन में काबिल बने हैं। यह नीति विशेष रूप से NPA (Non-Performing Assets) और वित्तीय स्थिरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जो आगे के अध्यायों में विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।
चरण 1: Tier 1 और Tier 2 पूंजी को जोड़ें: Rs.500 करोड़ + Rs.300 करोड़ = Rs.800 करोड़।
चरण 2: RWA = Rs.4000 करोड़ है।
चरण 3: CAR निकालने के लिए सूत्र लगाएं:
\[ CAR = \frac{800}{4000} \times 100 = 20\% \]
उत्तर: बैंक का CAR 20% है, जो RBI के मानक (कम से कम 9%) से अधिक है।
चरण 1: CAR की गणना करें:
\[ CAR = \frac{700 + 300}{7500} \times 100 = \frac{1000}{7500} \times 100 = 13.33\% \]
चरण 2: RBI की बेसल III मानक के अनुसार कम से कम CAR 11.5% होनी चाहिए।
उत्तर: बैंक का CAR 13.33% है, अतः यह RBI के मानक को पूरा करता है।
चरण 1: विभिन्न संपत्तियों के जोखिम भारित मान निकालें:
चरण 2: इनका योग करें: Rs.2000 करोड़ + Rs.1500 करोड़ + Rs.200 करोड़ = Rs.3700 करोड़।
उत्तर: बैंक की कुल RWA Rs.3700 करोड़ है।
चरण 1: बेसल I में मार्केट रिस्क शामिल नहीं था, इसका ध्यान केवल क्रेडिट रिस्क पर था।
चरण 2: विकल्प B (मार्केट रिस्क को नियंत्रित करना) बेसल I का उद्देश्य नहीं था।
उत्तर: विकल्प (B) सही है।
चरण 1: बेसल III ने लीवरेज अनुपात, नकदी प्रवाह एवं तरलता पर नए मानक लागू किए हैं।
चरण 2: मार्केट रिस्क का समावेशन बेसल II से शुरू हुआ था।
चरण 3: विकल्प D (पूंजी पर कोई सीमा न लगाना) गलत है क्योंकि बेसल III ने पूंजी गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर कड़े मानक लागू किए हैं।
उत्तर: विकल्प (D) सही है क्योंकि यह बेसल III का सुधार नहीं है।
प्रयोग: जब CAP की गणना करनी हो
प्रयोग: विभिन्न बेसल संस्करणों के प्रश्नों में
प्रयोग: RWA संबंधित गणना करने में
प्रयोग: परीक्षा में CAR सीमा से संबंधित प्रश्न में
प्रयोग: बैंकिंग जागरूकता के समग्र विषय में
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