सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन भारत की एक प्रमुख नगरीय संस्कृ ति थी, जो लगभग 3300 ई.पू. से लेकर 1300 ई.पू. तक फ़ैली हुई थी। यह सभ्यता आज के पाकिस्तान और पश्चिमी भारत के क्षेत्र में पाई गई है। इस खंड में हम इसके इतिहास, नगरी नियोजन, अर्थव्यवस्था, समाज और पतन के सभी पहलुओं का विस्तारपूर्वक अध्ययन करेंगे।
सिंधु घाटी सभ्यता की खोज 1920 के दशक में कुछ ब्रिटिश और भारतीय पुरातत्वविदों द्वारा हुई थी। इसे भारत की सबसे पुरानी सभ्यताओं में गिना गया है।
इस सभ्यता की खोज डॉ॰ राम सिंह मरस्सी और सर जॉन मार्शल जैसे पुरातत्वविदों ने की। सूरत, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा इस सभ्यता के प्रमुख स्थल हैं।
| स्थल | स्थान | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|
| हड़प्पा | पाकिस्तान, पंजाब | नियोजित नगर, सभ्य जल निकासी प्रणाली |
| मोहनजोदड़ो | पाकिस्तान, सिंध | बड़ी नगरी, ग्रेट बाथ, विशाल संगमरमर के मकान |
| लौथल | गुजरात, भारत | समुद्री बंदरगाह, व्यापार केंद्र |
सिंधु घाटी सभ्यता के समय को तीन मुख्य कालों में बांटा जाता है:
सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता इसका शानदार नगरीकरण था, जिसमें नगर योजना वैज्ञानिक स्तर पर की गई थी।
शहरों के बीच चौड़ी और संकरी सड़कें बना कर नागरिकों को सुव्यवस्थित आवागमन की सुविधा दी गई थी। सड़कें पूर्व- पश्चिम तथा उत्तर-दक्षिण दिशा में बनी थीं।
प्रत्येक घर के पास जल निकासी व्यवस्था प्रतिष्ठित थी, जिससे गंदा पानी बाहर निकाला जाता था। प्रमुख गलियों में सीढ़ियों के साथ बड़े गटर बनाए गए थे।
मकानों को ईंटों से बना कर मजबूत बनाया गया था। इन मकानों में आंगन, पानी संग्रहण की व्यवस्था और भोजन बनाने के स्थान होते थे।
सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, पशुपालन, शिल्पकला, और व्यापार पर आधारित थी।
गेहूं और जौ की खेती प्रमुख थी। साथ ही भैंस, भैंस, भेड़ और सूअर का पालन भी किया जाता था।
मूर्तिकला के साथ-साथ मोती जड़ित आभूषण, मिट्टी के बर्तन, सफेद पत्थरों से निर्मित वस्तुएं महत्वपूर्ण थीं।
सिंधु घाटी के लोग मेसोपोटामिया, अफगानिस्तान आदि स्थलों के साथ व्यापार करते थे। व्यापार के लिए मोती, गहने, मृत्तिका के बर्तन आदान-प्रदान किए जाते थे।
सिंधु घाटी सभ्यता की संस्कृति तथा सामाजिक व्यवस्था भी अध्ययन के केन्द्र में रही हैं।
सिंधु लिपि अभी तक पूरी तरह से नहीं पढ़ी गई है। यह पיקטोग्राफिक (चित्रलिपि) प्रतीकों पर आधारित थी।
मंदिरों के अभाव में कुछ स्तूप, यज्ञालय और प्रतीकात्मक मूर्तियां मिली हैं। यह माना जाता है कि वे प्राकृतिक देवताओं की उपासना करते थे।
सामाजिक वर्गों का स्पष्ट विभाजन नहीं मिलता, परन्तु नगर नियोजन और आवास व्यवस्था से यह जाहिर होता है कि मध्यम वर्ग और व्यापार वर्ग मौजूद थे।
लगभग 1900 ई.पू. से किन्हीं कारणों से सिंधु घाटी सभ्यता का पतन आरंभ हुआ। आज तक इसके कई कारण विवादित हैं।
सभ्यता के पतन के बाद वैदिक काल की शुरुआत हुई, जिसे हम अध्याय के अगले भाग में विस्तृत रूप से देखेंगे।
सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों और सिक्कों के अध्ययन से इस सभ्यता की आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन की समझ में अभी भी नए तथ्य उभर रहे हैं।
चरण 1: सिंधु घाटी सभ्यता के प्रसिद्ध स्थल मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और लौथल हैं।
चरण 2: इन स्थलों से प्राप्त अवशेषों से हमें उस कालीन संस्कृति और जीवनशैली की जानकारी मिली।
उत्तर: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लौथल
चरण 1: मुख्य नगरों में योजनाबद्ध सड़कें पूर्व- पश्चिम और उत्तर-दक्षिण दिशा में बनी थीं।
चरण 2: जल निकासी प्रणाली एवं गटर-नालियां अच्छी तरह निर्मित थीं, जिससे स्वच्छता बनी रहती थी।
चरण 3: आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र स्पष्ट रूप से अलग थे। मकान ईंटों के बने थे और उनमें आंगन व जलस्त्रोत थे।
उत्तर: योजनाबद्ध सड़कें, वैज्ञानिक जल निकासी, अलग-अलग आवासीय एवं व्यापारिक क्षेत्र
चरण 1: सिंधु घाटी की लिपि चित्रलिपि (पिक्टोग्राफिक) थी जिसमें लगभग 400 से 500 प्रतीक हैं।
चरण 2: यह आज तक पूरी तरह से समझी या अनुवादित नहीं हो पाई है।
चरण 3: इसका कारण प्रतीकों का अस्पष्ट होना और अन्य ज्ञात भाषा से संबद्धता का अभाव है।
उत्तर: चित्रलिपि आधारित लिपि जो अनसुलझी है; इसकी पढ़ाई में प्रतीकों की अस्पष्टता मुख्य बाधा है।
चरण 1: जलवायु परिवर्तन ने क्षेत्र में सूखे की स्थिति पैदा की।
चरण 2: सिंधु नदी का मार्ग बदलने से कूड़ा पानी और कृषि प्रभावित हुई।
उत्तर: जलवायु परिवर्तन से सूखा एवं सिंधु नदी का मार्ग परिवर्तन।
चरण 1: मेसोपोटामिया से प्राप्त मोहरें और वस्तुएं सिंधु घाटी के व्यापार को दिखाती हैं।
चरण 2: लौथल की बंदरगाह संरचना भी समुद्री व्यापार के प्रमाण हैं।
उत्तर: मेसोपोटामिया से प्राप्त वस्तुएं, लौथल का समुद्री बंदरगाह।
जब इस्तेमाल करें: स्थलों का स्मरण तभी आसानी से होगा जब आप तैयारी करते समय इसे बार-बार दोहराएं।
जब इस्तेमाल करें: नक्शा आधारित प्रश्नों या नगर व्यवस्था वाले प्रश्नों में तेजी से उत्तर देने के लिए।
जब इस्तेमाल करें: पतन, राजवंश की अस्थिरता या सभ्यताओं के बीच संबंध समझाने के प्रश्नों में।
जब इस्तेमाल करें: लेखन और भाषा पर प्रश्नों में सरलता के लिए।
जब इस्तेमाल करें: नीति या अर्थव्यवस्था विषयक प्रश्नों को प्रभावी उत्तर देने के लिए।
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