मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारत के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली साम्राज्य था। इसकी स्थापना लगभग 321 ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में चंद्रगुप्त मौर्य ने की। यह साम्राज्य अपने राजनीतिक एकीकरण, समृद्ध प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक विकास, धार्मिक सौहार्द तथा सांस्कृतिक उत्कर्ष के लिए प्रसिद्ध है। इस अध्याय में हम मौर्य साम्राज्य की स्थापना, शासन व्यवस्था, आर्थिक एवं सामाजिक संरचना, तथा धर्म एवं संस्कृति के पहलुओं का विस्तारपूर्वक अध्ययन करेंगे।
मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी, जिन्होंने नंद वंश के अंतर्गत मगध साम्राज्य पर अधिकार जमा कर एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। इसके पश्चात उनके पुत्र बिन्दुसार तथा पोते साम्राट अशोक ने साम्राज्य के विस्तार और सम्यक प्रशासन को और मजबूत किया।
मौर्य साम्राज्य का केन्द्र मगध था, जो वर्तमान बिहार में स्थित है। इसके विस्तार ने लगभग समस्त उत्तर भारत, मध्य भारत, पश्चिमी भारत और वर्तमान अफगानिस्तान तक फैला था। सम्यक प्रशासन, कठोर अनुशासन और सुदृढ़ सैन्य शक्ति के कारण मौर्य साम्राज्य एक प्रभावशाली राज्य सिद्ध हुआ।
मौर्य शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग थे - प्रशासन, न्याय व्यवस्था और सैन्य।
राज्य को कई विभागों में बाँटा गया था जैसे वित्त विभाग, सैनिक विभाग, कर विभाग और पुलिस प्रशासन। प्रत्येक विभाग के प्रमुख अधिकारी राजा को प्रतिवेदन देते थे। प्राचीन ग्रंथ 'अर्थशास्त्र' में चाणक्य ने इन विभागों का विवेचन किया है।
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मौर्य साम्राज्य में न्याय व्यवस्था सुव्यवस्थित थी। न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती थी जो कानून के अनुसार न्याय करते थे। राजा स्वयं सर्वोच्च न्यायाधीश था। अपराधों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान होते थे।
खेती मौर्य साम्राज्य की मुख्य आर्थिक आधार थी। सिंचाई व्यवस्था को विकसित किया गया था जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई। कराधान प्रणाली में भूमि कर, व्यापार कर और उपभोग कर शामिल थे।
मौर्य काल के दौरान आंतरिक व्यापार और विदेशी व्यापार दोनों में वृद्धि हुई। व्यापार मार्गों का विकास किया गया, जिससे रोमन साम्राज्य सहित कई बाह्य लोकों से संपर्क बढ़ा।
सड़कों का निर्माण, विश्रामगृहों और पांचालों की व्यवस्था ने व्यापार को सुगम बनाया। नगर सुरक्षित और सुव्यवस्थित थे, जिनमें बाजार और हस्तशिल्पी कार्य होते थे।
मौर्य काल में धर्म का बड़ा प्रभाव था। चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म को अपनाया और अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाकर उसका प्रचार किया। अशोक ने धर्म के प्रचार हेतु स्तम्भों का निर्माण कराया जो बौद्ध शिक्षाओं के सार थे।
बौद्ध धर्म के अंगीकार के कारण धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता को बल मिला। मौर्य सम्राज्य के स्थापत्य कला में स्तम्भ, स्तूप एवं मठ इस काल की विशेषता हैं।
मौर्य साम्राज्य में समाज वर्गीकृत था परंतु धार्मिक सहिष्णुता और राज्य की नीति ने सामजिक स्थिरता बनाए रखी। धार्मिक मतभेदों के बावजूद समरसता बनी रही। मजदूर, किसान, व्यापारी, तथा अधिकारी वर्ग के बीच समन्वय था।
चरण 1: मौर्य साम्राज्य की स्थापना लगभग 321 ईसा पूर्व हुई थी।
चरण 2: चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश को पराजित कर यह साम्राज्य स्थापित किया था।
चरण 3: अशोक और बिन्दुसार चंद्रगुप्त के उत्तराधिकारी थे।
उत्तर: विकल्प (B) चंद्रगुप्त मौर्य सही है।
चरण 1: मौर्य शासन में राजा के अधीन प्रशासन के विभिन्न विभाग थे।
चरण 2: ये विभाग सीधे राजा को जवाबदेह थे और राज्य का सम्यक प्रबंधन करते थे।
चरण 3: कोई भी प्रांत या नगर पूर्ण स्वतंत्र शासन नहीं करता था।
उत्तर: विकल्प (B) सही है क्योंकि यह केंद्रीयकृत शासन की विशेषता दर्शाता है।
चरण 1: अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म की ओर रुख किया।
चरण 2: उन्होंने अहिंसा और धर्म राज नीति का प्रचार किया।
चरण 3: युद्ध आधारित विस्तार उनकी नीति का हिस्सा नहीं था।
उत्तर: विकल्प (C) धर्म राज नीति और अहिंसा सही उत्तर है।
चरण 1: मौर्य काल में आधारिक कृषि कर्म था।
चरण 2: सिंचाई तथा भूमि सुधारों ने कृषि को बढ़ावा दिया।
उत्तर: विकल्प (C) खेती एवं कृषि सही है।
चरण 1: न्याय व्यवस्था राजा के अधीन थी जिसका राजा सर्वोच्च न्यायाधीश था।
चरण 2: न्यायाधीशों द्वारा कानून के अनुसार न्याय प्रदान किया जाता था।
चरण 3: दण्डात्मक कानून सख्त और प्रभावशाली थे, जो अपराध को रोकने में सहायक थे।
उत्तर: मौर्य न्याय व्यवस्था केंद्रित और कठोर दण्ड प्रणाली पर आधारित थी।
When to use: जब मौर्य साम्राज्य के प्रमुख शासकों के नाम याद करने हों।
When to use: प्रशासनिक संरचना और शासन व्यवस्था के प्रश्नों में सहायता हेतु।
When to use: बौद्ध धर्म और अशोक से जुड़े प्रश्नों में समय बचाने के लिए।
When to use: सामाजिक विषयों के ब्रश-अप के दौरान।
When to use: भूगोल और राजनीतिक केंद्रों के प्रश्नों के लिए।
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