आधुनिक भारत का इतिहास मुख्य रूप से भारत में उपनिवेशवाद के काल से प्रारंभ होता है, जब यूरोपीय शक्तियों ने भारत के विभिन्न भागों पर नियंत्रण स्थापित किया। इस युग में ब्रिटिश शासन का उद्देश्य था राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नियंत्रण। यह अवधि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के माध्यम से धीरे-धीरे समाप्त हुई। इस अध्याय में हम ब्रिटिश शासन की संरचना, स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य चरण, प्रमुख नेताओं की भूमिका तथा राष्ट्रीय आंदोलन के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
१७वीं शताब्दी के अंत में ईस्ट इंडिया कंपनी एक व्यापारिक संस्था के रूप में भारत आई। कंपनी का उद्देश्य था भारत से मसालों, कपड़ा और अन्य वस्तुओं का व्यापार करना। धीरे-धीरे कंपनी ने ठोस सैन्य और प्रशासनिक शक्ति अर्जित की, जिससे वह राजनैतिक प्रभुता स्थापित कर सकी।
ब्रिटिश शासन प्रणाली में ब्रिटिश गवर्नर-जनरल को सबसे ऊपर पद प्राप्त था। इसमें विभिन्न विभागों के माध्यम से न्याय, पुलिस, कर संग्रहण, सीमाओं की सुरक्षा आदि कार्य किए जाते थे। यह केंद्रीयकृत और सुदृढ़ संगठन था, जिसने भारत की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बदल डाला।
ब्रिटिश शासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कृषि प्रधानता से औद्योगिक उपनिवेश में परिवर्तित कर दिया। भारी कराधान और निर्यात-आधारित नीतियों ने भारतीय किसानों और कारीगरों को क्षति पहुँचाई। सामाजिक स्तर पर कई बदलाव हुए जैसे नई शिक्षा प्रणाली और सुधार आंदोलनों का उदय।
सिपाही क्रांति जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है, ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़ा सशस्त्र विद्रोह था। इसका कारण मुख्य रूप से सैनिक असंतोष, आर्थिक उत्पीड़न और सांस्कृतिक हस्तक्षेप था। इस क्रांति को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महत्त्वपूर्ण आरंभिक चरण माना जाता है।
1857 के बाद भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन विकसित होने लगे। इस दौर में भारत की राजनीति अधिक संगठित हुई और लोक जागरूकता बढ़ी।
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का गठन हुआ, जिसका उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार के साथ संवाद स्थापित कर भारत की समस्याओं का निदान। यह संगठन धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन का प्राथमिक मंच बन गया।
असहयोग आंदोलन (1920) महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया एक अहिंसात्मक आंदोलन था जिसमें ब्रिटिश सामान का बहिष्कार और सरकारी संस्थानों की अवहेलना शामिल थी। गांधीवादी नीतियाँ जैसे सत्याग्रह एवं अहिंसा भारतीय जनता में व्यापक समर्थन प्राप्त हुई।
1930 में महात्मा गांधी ने दांडी मार्च का नेतृत्व किया, जो नमक कर के विरुद्ध था। यह सविनय अवज्ञा आंदोलन भारत की स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण था, जिसने जनता को ब्रिटिश शासन के कानूनों से बगावत के लिए प्रेरित किया।
1942 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो' का आह्वान किया। यह आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ निर्णायक विद्रोह था।
स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं और महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई। उन्हें शिक्षित और जागरूक बनाकर आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया गया।
ब्रिटिश शासन के दौरान सामाजिक सुधार आंदोलनों का उदय हुआ जैसे सती प्रथा का अंत, विधवा पुनर्विवाह, जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रयास। ये सुधार राष्ट्रीयता की भावना के पूरक थे।
स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय उत्पादों को बढ़ावा दिया तथा ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार कराया। गांधीजी के उपवास आंदोलन ने न्याय और अहिंसा के भाव को मजबूत किया।
Step 1: सबसे पहले सैनिकों में असंतोष के कारणों को समझें जैसे वेतन का कम होना, सेवा में भेदभाव।
Step 2: धार्मिक और सांस्कृतिक कारण, जैसे बंदूक के कारतूस में गाय-भैंस की चर्बी का इस्तेमाल, जो सैनिकों के लिए अपमानजनक था।
Step 3: आर्थिक दबाव और किसानों तथा कारीगरों पर करों का कुर्बानी।
Answer: सिपाही क्रांति के मुख्य कारण सैनिक असंतोष, धार्मिक अनादर, आर्थिक कठोरताएं और ब्रिटिश अधीनता के बढ़ते दमन थे।
Step 1: वर्ष 1885 के आस-पास राजनीतिक गतिविधियों का अवलोकन करें।
Step 2: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीयों की संगठित आवाज़ की आवश्यकता महसूस हुई।
Step 3: इसके लिए एक मंच बनाने हेतु अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधि एकत्र हुए।
Answer: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन 1885 में हुआ, जिसका उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार से भारतीय हितों की वकालत तथा संवाद स्थापित करना।
Step 1: नमक कर के विरुद्ध सत्याग्रह की रणनीति को समझें।
Step 2: गांधीजी ने समुद्र तट तक २४० मील की पदयात्रा की, जहां उन्होंने स्वयं नमक बनाया।
Step 3: इस आंदोलन ने देशभर में ब्रिटिश कर कानूनों की अवहेलना को बल दिया।
Answer: दांडी मार्च ने ब्रिटिश कराधान के प्रतीक नमक कर का विरोध कर स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Step 1: उपवास को एक शारीरिक और मानसिक संघर्ष के रूप में देखें।
Step 2: इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार को अहिंसात्मक दबाव देना और सामाजिक-सांस्कृतिक बुराइयों के खिलाफ संदेश प्रसारित करना था।
Answer: गांधीजी के उपवास आंदोलनों का उद्देश्य न्याय प्राप्त करना, हिंसा से बचना और लोगों की चेतना जाग्रत करना था।
Step 1: सबसे पहले राजनीतिक स्वतंत्रता को समझना आवश्यक है; देश को ब्रिटिश शासन से मुक्त करना।
Step 2: आर्थिक स्वतंत्रता, जो भारत के संसाधनों और व्यापार पर नियंत्रण प्राप्त करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण थी।
Step 3: सामाजिक एवं सांस्कृतिक पुनरारंभ, जिसमें जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता आदि को मिटाना शामिल था।
Step 4: राष्ट्रीय एकता का सृजन, जिसमें सभी जाति, धर्म और वर्गों का समन्वय हो।
Answer: स्वतंत्रता संग्राम का प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करके भारत को एकात्मिक, आर्थिक रूप से स्वावलंबी एवं सामाजिक रूप से समतामूलक राष्ट्र बनाना था।
When to use: इतिहास के प्रश्नों को जल्दी और सटीक उत्तर देने के लिए
When to use: नीति-आधारित या व्यापक प्रश्नों के लिए
When to use: विश्लेषणात्मक प्रश्नों या निबंधात्मक प्रश्नों के लिए
When to use: वस्तुनिष्ठ परीक्षणों में शीघ्र उत्तर देने के लिए
When to use: सामाजिक इतिहास से जुड़े सवालों में
Progress tracking is paywalled — subscribe to mark subtopics as understood and save your streak.
Go to practice →