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राष्ट्रीय आंदोलन

राष्ट्रीय आंदोलन का परिचय

राष्ट्रीय आंदोलन (National Movement) से तात्पर्य उस व्यापक सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक प्रयास से है जो भारत को विदेशी शासन, विशेष रूप से ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र कराने हेतु किया गया। यह आंदोलन अनेक चरणों, विभिन्न प्रकार के संघर्षों एवं अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों का संग्रह है। आत्म-साक्षरता, सांस्कृतिक पुनरुज़्जीवन, असहयोग, गृहयुद्ध, सत्याग्रह जैसे विभिन्न प्रकार के सत्यनिष्ठ संघर्षों के द्वारा देशवासियों ने स्वतंत्रता प्राप्ति की दिशा में कार्य किया। इस अध्याय में ब्रिटिश शासन की शुरुआत से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक राष्ट्रीय आंदोलन के मुख्य घटकों को विस्तार से समझा जायेगा।

ब्रिटिश शासन की शुरुआत

ब्रिटिश शासन की नींव ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के स्थापना से पड़ी। ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 ईस्वी के बाद भारत में व्यापार हेतु ब्रिटेन द्वारा स्थापित एक निगम थी। धीरे-धीरे व्यापारिक गतिविधियों के स्थान पर राजनीतिक नियंत्रण भी एकत्रित करने लगी। इसके बाद, 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध पहला व्यापक अशस्त्र एवं शस्त्र समय संघर्ष था, जिसे कभी-कभी "भारतीय विद्रोह 1857" अथवा "सिपाही विद्रोह" भी कहा जाता है। इसकी असफलता के पश्चात ब्रिटिश शासन सीधे भारत पर केंद्रित हो गया।

graph TD    A[ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापार] --> B[राजनीतिक सत्ता का अधिग्रहण]    B --> C[पहला स्वतंत्रता संग्राम (1857)]    C --> D[ब्रिटिश राज की शुरुआत]    D --> E[संविधानिक और राजनीतिक सुधार]

स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चरण

राष्ट्रीय आंदोलन कई चरणों में बँटा हुआ था, जिनमें प्रत्येक का अपना महत्व और रणनीति थी।

  • सांस्कृतिक एवं सामाजिक सुधार : प्रारंभिक काल में भारतीय समाज के आंतरिक सुधार एवं जागरण पर ध्यान दिया गया। इस काल में राजा राम मोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसे सामाजिक सुधारकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • असहयोग और स्वदेशी आंदोलन : महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1919 के बाद असहयोग आंदोलन, 1920-22 के स्वदेशी आंदोलन देशव्यापी हुआ। इन आंदोलनों ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार एवं सरकारी संस्थाओं के बहिष्कार का आह्वान किया।
  • लोकप्रिय आंदोलन एवं क्रांतिकारी कार्य : भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध सक्रिय सशस्त्र संघर्ष किया। किसानों, मजदूरों और अन्य वंचित वर्गों का आंदोलन भी इसी दौर में तीव्र हुआ।

प्रमुख नेतागण एवं संगठन

राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान अनेक संगठन और नेता संयुक्त रूप से स्वतंत्रता के लिए काम करते रहे।

  • महाराजा गाँधी : सत्याग्रह एवं अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्ति के पिता कहे जाते हैं।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, आधुनिक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री एवं समाजवादी सिद्धांत के प्रबल समर्थक।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस : आंदोलन का प्रमुख संगठन, जिसने विभिन्न कालखंडों में स्वतंत्रता के लिए नेतृत्व दिया। इसके अलावा मुस्लिम लीग, अधिनियमवादी समूह और क्रांतिकारी संगठन भी सक्रिय थे।

भागीदारी घटक एवं नीतियाँ

राष्ट्रीय आंदोलन में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी रही, जिनकी पहचान मुख्य रूप से निम्नलिखित आंदोलनों से होती है:

  • दान्दी मार्च : 1930 में महात्मा गाँधी द्वारा नमक कानून के विरुद्ध चलायी गई सत्याग्रह यात्रा। इसे नमक सत्याग्रह भी कहते हैं।
  • भारत छोड़ो आंदोलन : 1942 में कांग्रेस ने अंग्रेजों के प्रति समर्पण से इनकार करते हुए स्वतंत्रता प्राप्ति के अंतिम संघर्ष का आह्वान किया।
  • किसान एवं मजदूर आंदोलन : सामाजिक व आर्थिक न्याय के लिए किसानों, मजदूरों ने अनेक बार आंदोलन किये जो राष्ट्रीय आंदोलन की मजबूती का हिस्सा थे।

आधुनिक केन्द्रीय संघर्ष

सविनय अवज्ञा, संविधानिक सुधार तथा गाँधी-नेहरू जैसे नेताओं के नेतृत्व में हुए संघर्ष राष्ट्रीय आंदोलन को दिशा एवं गति प्रदान करते रहे। परिणामस्वरूप 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली।

Key Concept

राष्ट्रीय आंदोलन (National Movement)

भारत को विदेशी शासन से स्वतंत्र कराने के लिए किया गया व्यापक सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक संघर्ष। इसमें कई चरण, आंदोलन और प्रमुख नेता शामिल थे।

WORKED EXAMPLES

Example 1: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का विश्लेषण Medium
1857 के विद्रोह के प्रमुख कारण बताइए और इसके परिणामों की संक्षिप्त व्याख्या करें।

Step 1: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कारणों में मुख्य हैं-सिपाहियों का असंतोष, ब्रिटिश नीतियों का शोषण, धार्मिक एवं सामाजिक आहतियाँ और आर्थिक संकट।

Step 2: इस विद्रोह ने ब्रिटिश शासन के कड़े नियंत्रण और सीधे प्रशासन की शुरुआत की, साथ ही भारतीय राष्ट्रीय चेतना को जन्म दिया।

Answer: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य कारण अर्थात् सिपाही असंतोष, आर्थिक उत्पीड़न और धार्मिक-दृष्टिकोण थे। परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया और सीधे भारत पर शासन शुरू किया।

Example 2: दांडी मार्च के उद्देश्य और प्रभाव Easy
दांडी मार्च क्यों आयोजित किया गया और इसका राष्ट्रीय आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?

Step 1: दांडी मार्च 1930 में महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश नमक कानून का विरोध करने के लिए आयोजित किया। उद्देश्य था ब्रिटिश नमक उत्पाद और बिक्री का बहिष्कार।

Step 2: इस आंदोलन ने पूरे देश में व्यापक असहयोग और सत्याग्रह की लहर खड़ी की, जिससे अंग्रेज़ी शासन को व्यापक चुनौती मिली।

Answer: दांडी मार्च नमक कानून के विरुद्ध एक अहिंसात्मक सत्याग्रह था जिसने भारतीय जनसमूह को स्वतंत्रता आन्दोलन मे सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

Example 3: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन और उद्देश्य Easy
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन कब हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य क्या था?

Step 1: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन 1885 में हुआ था।

Step 2: इसका उद्देश्य था भारतवासियों की राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना और ब्रिटिश शासन से सुधार हेतु शांतिपूर्ण संवाद द्वारा प्रयास करना।

Answer: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1885 में स्थापित हुई और इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी और स्वतंत्रता की मांग को संगठित करना था।

Example 4: असहयोग आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ Medium
असहयोग आंदोलन के प्रमुख तत्व और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

Step 1: असहयोग आंदोलन 1920-22 में महात्मा गांधी ने चंपारण, खेड़ा उपवास व मुस्लिम-हिंदू एकता के आधार पर चलाया।

Step 2: आंदोलन में छात्रों, कारीगारों और किसानों ने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार व सरकारी पदों का त्याग किया।

Answer: असहयोग आंदोलन ने भारतीय जनता को संगठित किया और ब्रिटिश शासन के प्रति अहिंसात्मक विरोध की नीति को मजबूती प्रदान की, जिससे राष्ट्रीय एकजुटता बढ़ी।

Example 5: भारत छोड़ो आंदोलन की भूमिका Hard
भारत छोड़ो आंदोलन कब शुरू हुआ और इस आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को किस प्रकार प्रभावित किया?

Step 1: भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त 1942 में कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य था ब्रिटिश राज के तहत जीवन असंभव है, इस संदेश को स्पष्ट करना।

Step 2: आंदोलन ने देशव्यापी जनसामान्य का समर्थन पाया, और अंग्रेज शासन को भारत से तत्काल प्रस्थान हेतु विवश किया।

Answer: भारत छोड़ो आंदोलन ने भारत में स्वतंत्रता की मांग को चरम पर पहुंचाया। इसके कारण ब्रिटिश सरकार को राजनीतिक समझौते करने के लिए बाध्य होना पड़ा, जिससे अंततः स्वतंत्रता संभव हुई।

Tips & Tricks

Tip: महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आंदोलन को कालक्रम (Timeline) में याद करें।

When to use: जब स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं का क्रम समझना हो।

Tip: नेताओं और आंदोलनों को जोड़ने के लिए सम्बंधित नीतियों या उपदेशों को नोट करें।

When to use: जब किसी नेता या आंदोलन की नीति या विचारधारा जानने हो।

Tip: प्रमुख आंदोलनों के गहन प्रभाव व लोकसहभागिता पर ध्यान दें।

When to use: परीक्षा में नीतिगत तथा सामाजिक प्रभाव से जुड़ा प्रश्न आने पर।

Tip: प्रतिद्वन्द्वी विकल्पों में भ्रम से बचने के लिए आंदोलन या नेता के काल और स्थान को ध्यान से जांचें।

When to use: MCQ में विकल्प समान दिखें तो काल व स्थान की पुष्टि हेतु।

Tip: अंग्रेजी शासन की राजनीतिक नीतियों को समझकर आंदोलन की व्याख्या करें।

When to use: ब्रिटिश नीतियों के विरोध में हुए आंदोलनों के प्रश्नों के लिए।

Common Mistakes to Avoid

❌ 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को केवल सैनिक विद्रोह मान लेना।
✓ 1857 को व्यापक सामाजिक एवं राजनीतिक विद्रोह के रूप में समझना चाहिए।
कई बार शामिल गैर-सैनिक जनता और उनके आर्थिक, धार्मिक कारणों की उपेक्षा हो जाती है।
❌ दांडी मार्च को सामान्य पैदल यात्रा समझ लेना।
✓ दांडी मार्च नमक कानून के विरोध में आयोजित एक संगठित सत्याग्रह था।
इस आंदोलन का राष्ट्रीय और राजनीतिक उद्देश्य भुला दिया जाता है।
❌ महात्मा गाँधी केवल असहयोग आंदोलन के नेता थे, अन्य आंदोलनों में उनकी भूमिका नकारना।
✓ महात्मा गाँधी ने अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया, जैसे दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन आदि।
गाँधीजी की भूमिका को सीमित कर देना उनकी व्यापक नेतृत्व क्षमता को कमतर आंकना होता है।

राष्ट्रीय आंदोलन - सारांश

  • ब्रिटिश शासन की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी से हुई।
  • 1857 का पहला स्वतंत्रता संग्राम ब्रिटिश शासन के खिलाफ था।
  • राष्ट्रीय आंदोलन विभिन्न चरणों में विभाजित था - सांस्कृतिक सुधार, असहयोग, क्रांतिकारी संघर्ष।
  • महात्मा गांधी, नेहरू जैसे नेता स्वतंत्रता आंदोलन के मुख्य स्तंभ थे।
  • दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन जैसे प्रमुख आंदोलनों ने जनसामान्य को जोड़ा।
Key Takeaway:

राष्ट्रीय आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता के लिए दीर्घकालिक संघर्ष था जिसने देश को एकजुट कर स्वतंत्रता दिलाई।

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