पेशीय तंत्र क्रीड़ाओं में शारीरिक गति, बल उत्पन्न करने और मांसपेशियों द्वारा कार्य संपादन हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तंत्र शरीर की कंकाल, स्नायु तथा न्यूरोन तंत्र के साथ संयुक्त होकर क्रीड़कों को गतिशील और सशक्त बनाता है।
इस खण्ड में पेशीयों के प्रकार, उनकी संरचना, संकुचन तंत्र, ऊर्जा स्रोत एवं मेटाबोलिज्म के साथ-साथ प्रमुख रोगों और विकारों का अध्ययन किया जाएगा। यह विषय कंकाल तंत्र और स्नायु यंत्र के अध्ययन से भी जुड़ा हुआ है जहाँ मांसपेशियों के संधियों को गति प्राप्त होती है।
पेशीय (Muscle) वे ऊतक होते हैं जो संकुचन कर गतिशीलता प्रदान करते हैं। मानव शरीर में मुख्यतः तीन प्रकार की पेशीयें पाई जाती हैं:
| पेशी का प्रकार | स्थान और कार्य | संयम |
|---|---|---|
| जिनीत (Skeletal) पेशी | कंकाल से जुड़ी, शरीर की इच्छामूलक गति प्रदान करती है | इच्छानुसार संचालित (स्वैच्छिक) |
| अस्वैच्छिक (Smooth) पेशी | आंतरिक अंगों की दीवारों में, स्वायत्त कार्य (जैसे रक्तवाहिकाएँ) | अस्वैच्छिक, निरंतर संचालित |
| हृदय (Cardiac) पेशी | हृदय के दीवार में, निरंतर संकुचन हेतु विशेष | स्वायत्त एवं तीव्र संकुचन |
मांसपेशी कोशिका को मायोसाइट कहते हैं। प्रत्येक मायोसाइट में छोटे धागों जैसे स्ट्रक्चर पाए जाते हैं जिन्हें मायोफिब्रिल्स कहा जाता है। ये मायोफिब्रिल्स पेशीय संकुचन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
मायोफिब्रिल्स छोटे छोटे खंडों से मिलकर बनते हैं जिन्हें सारकोमेर कहते हैं। प्रत्येक सारकोमेर दो मुख्य प्रकार के फिलामेंट्स से बना होता है: एक्टिन (पतला) और मायोसिन (मोटा)। ये फिलामेंट्स पेशीय संकुचन की क्रिया के दौरान एक-दूसरे के ऊपर सरकते हैं, जिससे पेशी संकुचित होती है।
सारकोमेर: पेशीय संकुचन की सबसे छोटी इकाई।
पेशीय संकुचन की क्रिया को समझने के लिए स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत (Sliding Filament Theory) सबसे मान्य मॉडल है। यह नियम बताता है कि एक्टिन और मायोसिन फिलामेंट एक-दूसरे के ऊपर सरकते हैं, जिससे पेशी की लंबाई कम होकर संकुचन होता है।
graph TD Calcium[कैशियम आयन (Ca^{2+}) रिलीज] ATP[ATP हाइड्रोलिसिस] Crossbridge[मायोसिन हेड का एक्टिन से जुड़ना (क्रॉसब्रिज गठन)] Powerstroke[पावरस्ट्रोक: मायोसिन हेड एक्टिन पर खींचता है] Relaxation[पेशी का विश्राम] Calcium --> Crossbridge ATP --> Crossbridge Crossbridge --> Powerstroke Powerstroke --> Relaxationकैशियम आयन (Ca²⁺) पेशी संकुचन हेतु संकेत भेजते हैं। ATP ऊर्जा प्रदान करता है जिससे मायोसिन हेड एक्टिन के साथ जुड़कर पावरस्ट्रोक करता है।
पेशीय संकुचन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो एटीपी (adenosine triphosphate) द्वारा पूर्ति की जाती है। ऊर्जा उत्पादन दो तरीकों से होता है:
| ऊर्जा प्रकार | ऑक्सीजन की आवश्यकता | उत्पादित ATP की मात्रा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| एरोबिक | चाहिए | 36-38 ATP प्रति ग्लूकोज | धीरगामी दौड़ |
| एनरोबिक | नहीं चाहिए | 2 ATP प्रति ग्लूकोज | तेज दौड़, भारोत्तोलन |
प्रमुख रोग एवं विकार निम्नलिखित हैं:
चरण 1: ATP ऊर्जा का स्रोत है। यह एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट होता है।
चरण 2: ATP पानी के साथ प्रतिक्रिया कर ADP, इनऑर्गेनिक फॉस्फेट और ऊर्जा देता है।
चरण 3: यह ऊर्जा मायोसिन हेड को एक्टिन पर पावरस्ट्रोक करने में उपयोग होती है, जिससे पेशी संकुचित होती है।
उत्तर: ATP संकुचन के लिए ऊर्जा देता है। ATP + H_2O \rightarrow ADP + P_i + ऊर्जा।
चरण 1: जिनीत (Skeletal) पेशी - कंकाल से जुड़ी, स्वैच्छिक होती हैं, शरीर की इच्छा अनुसार गति करती हैं।
चरण 2: अस्वैच्छिक (Smooth) पेशी - आंतरिक अंगों तथा रक्त वाहिकाओं में होती हैं, स्वायत्त क्रियाएं करती हैं।
चरण 3: हृदय (Cardiac) पेशी - हृदय की दीवार बनाती हैं, निरंतर संकुचन के लिए सक्षम और स्वायत्त होती हैं।
उत्तर: जिनीत, अस्वैच्छिक और हृदय पेशी; क्रमशः इच्छानुसार गति, स्वायत्त गतिविधियाँ, और हृदय क्रिया नियंत्रित करती हैं।
चरण 1: यह सिद्धांत बताता है कि पेशीय संकुचन में एक्टिन और मायोसिन फिलामेंट एक-दूसरे के ऊपर सरकते हैं।
चरण 2: इस दौरान फिलामेंट की लंबाई नहीं बदलती, पर सारकोमेर की कुल लंबाई घट जाती है।
चरण 3: परिणामस्वरूप पेशी संकुचित हो जाती है और गति उत्पन्न होती है।
उत्तर: एक्टिन-मायोसिन के परस्पर सरकने से पेशी संकुचन होता है, जिसे स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत कहते हैं।
चरण 1: लंबी अवधि की कसरत में शरीर एरोबिक ऊर्जा प्रणाली का उपयोग करता है।
चरण 2: एरोबिक मेटाबोलिज्म में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है।
चरण 3: इससे 36-38 ATP अणु उत्पादित होते हैं जो निरंतर ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उत्तर: लंबी दौड़ के दौरान एरोबिक ऊर्जा प्रणाली कार्य करती है क्योंकि यह अधिक ATP उत्पन्न करती है और थकान कम होती है।
चरण 1: पेशीय थकान मांसपेशियों की कार्यक्षमता में गिरावट को कहते हैं।
चरण 2: तीव्र कसरत में ATP की कमी तथा मांसपेशी में लैक्टिक एसिड संचय होता है।
चरण 3: इन कारणों से पेशी संतुलित संकुचन नहीं कर पाती और थकान महसूस होती है।
उत्तर: ATP की कमी एवं लैक्टिक एसिड के कारण पेशीय थकान होती है, जिससे मांसपेशी कमजोर और जकड़न होती है।
जब उपयोग करें: प्रश्न में पेशीयों के प्रकार या कार्य पूछे जाने पर।
जब उपयोग करें: संकुचन प्रक्रिया या पेशीय गतिशीलता के प्रश्नों में।
जब उपयोग करें: ऊर्जा उत्पादन एवं ATP की भूमिका से संबंधित प्रश्नों में।
जब उपयोग करें: मेटाबोलिज्म व ऊर्जा उपयोग के प्रश्न में तेज़ निर्णय हेतु।
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