ग्रंथि तंत्र शरीर के उन विशेष अंगों तथा ऊतकों का समूह है, जो रासायनिक संदेशकों के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों को नियंत्रित करते हैं। इसे हार्मोनल सिस्टम भी कहा जाता है। यह तंत्र शरीर में जैव रासायनिक संतुलन (हॉर्मोन संतुलन) बनाए रखने एवं विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को समान्वित करने में सहायक होता है। इस अध्याय में हम अंतःस्रावी और बहिरस्रावी ग्रंथियों के प्रकार, उनके बनावट, कार्य और हार्मोन के नियंत्रण-प्रक्रिया को समझेंगे।
ग्रंथियों को मुख्यत: दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
| ग्रंथि प्रकार | स्राव | स्राव स्थान | मूल उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अंत:स्रावी | हार्मोन | प्रत्यक्ष रक्त में | थायरॉयड, अधिवृक्क ग्रंथि |
| बहिरस्रावी | पसीना, लार, पाचक रस आदि | नली के माध्यम से सतह या आंतरिक गुहा | पसीना ग्रंथि, लार ग्रंथि |
| मिश्रित | हार्मोन + पाचक रस | दोनों स्थानों पर | पैंक्रियास |
यह गर्दन के सामने वाली भाग में स्थित होती है। यह दो मुख्य हार्मोन निकालती है: थायरोक्सिन (T4) और ट्राययोडोथायरोनिन (T3)। ये हार्मोन शरीर की चयापचय दर (मेटाबोलिज्म रेट) को नियंत्रित करते हैं और विकास तथा ऊर्जा उत्पादन में सहायक होते हैं।
यह गुर्दे के ऊपर स्थित दो छोटी ग्रंथियाँ हैं। ये कोर्टिसोल, एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे हार्मोन निकालती हैं, जो तनाव के समय शरीर के प्रतिक्रिया (फाइट या फ्लाइट) में मदद करते हैं।
यह मिश्रित ग्रंथि है जो पाचक रस के साथ-साथ अंत:स्रावी हार्मोन इंसुलिन और ग्लूकागन भी स्रावित करती है। इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है जबकि ग्लूकागन उसे बढ़ाता है।
यह मस्तिष्क के आधार पर स्थित छोटी ग्रंथि है जो कई प्रमुख हार्मोन जैसे ग्रोथ हार्मोन, एड्रीनोकॉर्टिकोट्रोपिक हार्मोन (ACTH), थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH) आदि जारी करती है। यह ग्रंथियाँ अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करती हैं।
हार्मोन रासायनिक संदेशक होते हैं, जो ग्लैंड से स्रावित होकर लक्ष्य ऊतकों/अंगों पर प्रभाव डालते हैं। ये अमीनो अम्ल, पेप्टाइड, स्टेरॉयड या मोनोअमिन के रूप में हो सकते हैं।
हार्मोन का स्तर न्यूनतम उतार-चढ़ाव में संतुलित रहता है, इसके लिए नकारात्मक प्रत्युत्तर (negative feedback) तंत्र काम करता है। उदाहरण के लिए, जब रक्त में थायरॉक्सिन की मात्रा बढ़ जाती है, तो पिट्यूटरी ग्रंथि थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन का स्राव कम कर देती है जिससे थायरॉयड की गतिविधि घटती है।
graph TD A[रक्त में हार्मोन स्तर बढ़ना] --> B[पिट्यूटरी ग्रंथि को संकेत] B --> C[थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH) का स्राव कम] C --> D[थायरॉयड ग्रंथि की सक्रियता कम] D --> E[हार्मोन स्तर गिरना] E --> A
ग्रंथि तंत्र की असंतुलन से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। प्रमुख रोग निम्नलिखित हैं:
हार्मोन स्राव के बाद, ये रक्त परिसंचरण के माध्यम से पूरे शरीर में गतिमान हो जाते हैं और विशिष्ट लक्ष्य अंग/ऊतकों पर प्रभाव डालते हैं। इस प्रकार से हार्मोनल नियंत्रण परिसंचरण तंत्र की सक्रिय भूमिका से जुड़ा होता है। इससे शरीर में संयोजन तथा अभिक्रिया की जटिल प्रक्रिया संपन्न होती है।
Step 1: थायरॉयड हार्मोन मुख्यत: मेटाबोलिज्म दर को नियंत्रित करता है।
Step 2: ये हार्मोन शरीर की ऊर्जा उत्पादन क्षमता, तापमान नियंत्रण, और विकास को प्रभावित करते हैं।
Answer: थायरॉयड हार्मोन शरीर के चयापचय (metabolism) की दर को नियंत्रित करता है।
Step 1: पिट्यूटरी ग्रंथि ग्रोथ हार्मोन, ACTH, TSH आदि हार्मोन स्रावित करती है।
Step 2: ये हार्मोन अन्य ग्रंथियों (जैसे थायरॉयड, अधिवृक्क) को सक्रिय या दबाने के लिए संकेत देते हैं।
Answer: पिट्यूटरी ग्रंथि हार्मोन द्वारा अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करती है, जिससे शरीर के हार्मोन संतुलन में सुधार होता है।
Step 1: दिया गया: \(I = 120\) mg/dL, \(U = 80\) mg/dL
Step 2: \(\Delta G = I - U = 120 - 80 = 40\) mg/dL
Answer: रक्त शर्करा स्तर में 40 mg/dL की वृद्धि हुई है।
Step 1: थायरॉयड हार्मोन की कमी के कारण मेटाबोलिज्म धीमा हो जाता है।
Step 2: इससे मुख्य लक्षण होते हैं: थकावट, वजन बढ़ना, ठंड लगना।
Answer: थकावट और वजन बढ़ना हाइपोथायरायडिज्म के मुख्य लक्षण हैं।
Step 1: थायरॉयड मुख्यतः T3, T4 हार्मोन स्रावित करता है जो मेटाबोलिज्म दर बढ़ाते हैं।
Step 2: अधिवृक्क हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल, एड्रेनालिन) तनाव प्रतिक्रिया, रक्तचाप और ऊर्जा सृजन में सहायक होते हैं।
Step 3: थायरॉयड गंभीरता से विकास नियंत्रण पर केन्द्रित होती है, जबकि अधिवृक्क स्राव तनाव प्रबंधन और वोल्यूम विनियमन में सक्रिय है।
Answer:
| हार्मोन | थायरॉयड | अधिवृक्क ग्रंथि |
|-------------|---------------------------------|---------------------------------|
| प्रमुख हार्मोन | T3, T4 | एड्रेनालिन, कोर्टिसोल |
| कार्य | मेटाबोलिज्म नियंत्रण, विकास | तनाव प्रतिक्रिया, रक्तचाप नियंत्रण |
When to use: जब ग्रंथि के प्रकार और उनके कार्यों के बीच अंतर पूछे जाएं।
When to use: हार्मोन विनियमन के सवालों में उत्तर देते समय।
When to use: रोग एवं हार्मोन क्रियावली के विषय में उत्तर देते समय।
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