औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 भारत में श्रमिक और नियोक्ता के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों के समाधान हेतु बनाया गया कानूनी ढांचा है। इस अधिनियम के अंतर्गत 'छंटनी' (Retrenchment) एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसका अर्थ एवं प्रावधान प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। इस अध्याय में छंटनी की परिभाषा, कानूनी प्रावधान, उससे सम्बंधित अधिकारी एवं प्रक्रियाएं समझाई जाएँगी।
छंटनी का अर्थ है किसी उद्योग या प्रतिष्ठान में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या को आर्थिक, तकनीकी या अन्य आवश्यक कारणों से स्थायी रूप से कम करना। इसे आमतौर पर श्रमिकों की स्थायी सेवा समाप्ति के रूप में देखा जाता है। इस परिभाषा को औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 2(oo) में विस्तार से वर्णित किया गया है।
छंटनी: किसी उद्योग में कर्मचारियों की स्थायी सेवा को किसी कारणवश समाप्त करना, जिससे श्रमिकों की संख्या कम हो। यह लेऑफ (जिसमें कर्मचारियों को अस्थायी रूप से छुट्टी पर भेजा जाता है) से भिन्न है।
इस अधिनियम में लेऑफ का आशय होता है अस्थायी निष्कासन, जहाँ कर्मचारी नियमित अवधि के बाद फिर से कार्य पर लौट आते हैं, जबकि छंटनी स्थायी सेवा समाप्ति है। अतः छंटनी एक गंभीर विषय है जिसके नियम कानून सख्त और स्पष्ट हैं।
| विशेषता | छंटनी | लेऑफ | बंद |
|---|---|---|---|
| सेवा समाप्ति | स्थायी | अस्थायी | उद्योग पूरी तरह से बंद |
| कारण | आर्थिक, तकनीकी आदि | कार्य की अस्थायी कमी | कंपनी का पूर्ण बंद होना |
| कानूनी प्रावधान | धारा 2(oo), धारा 25F | धारा 2(oo), अन्य प्रावधान | धारा 10 |
औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 2(oo) में छंटनी की परिभाषा दी गई है, जो किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति को नियंत्रित करती है। साथ ही, धारा 25F में छंटनी से पहले नियोक्ता को कर्मचारी को नोटिस देने, मुआवजा देने तथा औद्योगिक न्यायाधिकरण के समक्ष आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने का प्रावधान है।
यह धारा निम्नलिखित परिस्थितियों में छंटनी को परिभाषित करती है:
graph TD A[नियोक्ता निर्णय करता है] --> B{क्या कर्मचारी संख्या 100+ है?} B -- हाँ --> C{क्या छंटनी 1/5 से अधिक है?} B -- नहीं --> D[धारा 25F लागू नहीं] C -- हाँ --> E[तीन माह नोटिस देना और मुआवजा देना] C -- नहीं --> F[लगभग बिना नोटिस के छंटनी] E --> G[औद्योगिक न्यायाधिकरण को सूचना] F --> Gछंटनी की प्रक्रिया में नियोक्ता के अतिरिक्त औद्योगिक न्यायाधिकरण की भूमिका होती है, जो विवादों के निवारण हेतु मध्यस्थता का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं ताकि छंटनी की वैधता एवं आवश्यकताएं सही संदर्भ में जाँची जा सकें।
छंटनी का कोविड-19 महामारी के दौरान या उद्योग में आर्थिक संकट के वक्त व्यापक प्रभाव देखा गया। इससे कर्मचारियों के रोजगार, सामाजिक सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है। नियोक्ताओं व कर्मचारियों के लिए उचित नियमन तथा मध्यस्थता उपाय आवश्यक होते हैं।
चरण 1: कंपनी में कर्मचारी संख्या = 150 > 100, अतः धारा 25F लागू होगी।
चरण 2: 40 कर्मचारियों की छंटनी होनी है। 1/5 कर्मचारी = 150 x \frac{1}{5} = 30। क्योंकि 40 > 30, अतः नोटिस देना अनिवार्य है।
चरण 3: धारा 25F के अनुसार, नियोक्ता को तीन माह पूर्व नोटिस देना आवश्यक है।
उत्तर: कंपनी को 40 कर्मचारियों की छंटनी के लिए तीन माह पूर्व नोटिस देना आवश्यक है।
चरण 1: यदि किसी उद्योग के कर्मचारी 100 या उससे अधिक हों, तो 1/5 या उससे अधिक छंटनी पर तीन माह का नोटिस अनिवार्य है।
चरण 2: बिना नोटिस के छंटनी कानूनन अवैध और अनुचित होगी।
उत्तर: यह प्रक्रिया गलत है क्योंकि अधिनियम के अनुरूप नोटिस देना आवश्यक होता है। बिना नोटिस के छंटनी अवैध मानी जाएगी।
चरण 1: छंटनी हेतु कर्मचारी को तीन माह का नोटिस देना आवश्यक है या इसके बराबर वेतन का भुगतान करना होगा।
चरण 2: इसके अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष के काम के लिए एक माह का वेतन बतौर मुआवजा देना होगा। उदाहरणतः 5 साल सेवा के लिए 5 माह का वेतन।
चरण 3: नोटिस और मुआवजे दोनों की शर्तें अधिनियम 25F में वर्णित हैं।
उत्तर: तीन माह का नोटिस या वेतन एवं प्रत्येक वर्ष के काम के आधार पर मुआवजा दिया जाता है।
चरण 1: कर्मचारी औद्योगिक विवाद मामले में उद्योग संबंधी औद्योगिक न्यायाधिकरण का सहारा ले सकते हैं।
चरण 2: न्यायाधिकरण विवाद का समाधान मध्यस्थता, सुलह या निर्णाण द्वारा करता है।
चरण 3: न्यायाधिकरण के सामने उपयुक्त दस्तावेज और कारण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
उत्तर: कर्मचारी औद्योगिक न्यायाधिकरण में मध्यस्थता हेतु आवेदन कर सकते हैं,那里 विवाद का समाधान किया जाएगा।
चरण 1: धारा 2(oo) में छंटनी की परिभाषा दी गई है।
चरण 2: धारा 25F में छंटनी से पहले नोटिस, मुआवजे के नियम हैं।
चरण 3: धारा 10 का संबंध बंद से है, न कि छंटनी से।
उत्तर: सही विकल्प है (A) और (B)।
जब उपयोग करें: छंटनी के कानूनी नियम पूछे जाएं।
जब उपयोग करें: सामान्य अर्थ और कानूनी अर्थ के सवाल में भेद पहचानें।
जब उपयोग करें: धाराओं के संदर्भात्मक उत्तर देने में सहायता के लिए।
जब उपयोग करें: औद्योगिक विवाद व छंटनी से जुड़े न्यायालयों पर आधारित प्रश्न।
जब उपयोग करें: किसी भी छंटनी के सीमा से सम्बन्धित सवाल में जल्दी उत्तर के लिए।
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