राष्ट्रीय आंदोलन भारत के इतिहास में वह महत्वपूर्ण काल है जब भारतीय समाज ने ब्रिटिश शासकों के विरुद्ध संगठित होकर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष प्रारंभ किया। यह आंदोलन अनेक चरणों, विचारधाराओं एवं क्रांतिकारियों के योगदान से विस्तृत हुआ। इस अध्याय में हम इस आंदोलन के प्रमुख घटनाक्रमों, नेतृत्व, विचारधाराओं तथा उसके ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से समझेंगे।
प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन वह आरंभिक काल था जब भारतीय समाज में पश्चिमी शिक्षा, विचारधाराओं और राजनीतिक जागरूकता के प्रभाव से देश की स्वतंत्रता की भावना उभरी। इस अवधि में सबसे पहला महत्त्वपूर्ण संग्राम और राजनीतिक संगठन अस्तित्व में आए।
1857 का स्वतंत्रता संग्राम, जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम या सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है, भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के विरुद्ध एक व्यापक ग्रामीण तथा सैनिक खड़ा हुआ था। इस संघर्ष में शहर-गांव, अमीर-गरीब सभी वर्गों के लोग शामिल थे। इस विद्रोह ने देशवासियों को British हुकूमत के विरुद्ध पहली बार संगठित किया।
graph TD A[1857 का स्वतंत्रता संग्राम] --> B[कारण] B --> C[सैनिकों का असंतोष] B --> D[भौतिक एवं सांस्कृतिक उत्पीड़न] B --> E[धार्मिक आहारण और राजनीतिक कारण] A --> F[प्रमुख कारक] F --> G[मुनिया की भूमिका] F --> H[लगातार लड़ाई और विद्रोह]
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार से न्याय और राजनीतिक सुधार की मांग करना। कांग्रेस ने प्रारंभ में शांति पूर्ण मार्ग अपनाया और आधुनिक भारत के लिए राजनीतिक चेतना का उद्गम बिंदु बनी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पीछे एल्गिन काउंसिल के सदस्य अलीगढ़ के दयानंद सरस्वती, दादाभाई नौरोजी और अन्य क्रांतिकारी व्यक्तित्वों का योगदान था।
इस काल में कांग्रेस मुख्यतः प्यारामर्शात्मक (advisory) भूमिका में थी। उन्होंने ब्रिटिश प्रशासन के सुधार और भारतीयों की भागीदारी की माँग की। इस समय तक क्रांतिकारी एवं असहयोगी विचारधाराएं विकसित नहीं हुई थीं।
गांधीजी के आगमन और उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक नयी दिशा दी। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों के आधार पर व्यापक असहयोग आंदोलन चलाया।
अहिंसात्मक असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी सेवाओं से त्याग और सामाजिक सुधार के रूप में चलाया गया। इस आंदोलन ने व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया।
नमक सत्याग्रह या दांडी मार्च गांधीजी द्वारा रचित नमक अधिनियम के विरोध में किया गया था। 240 मील तक चलकर दांडी पहुंचे गए और समुद्र से नमक बनाकर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी गई। यह आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण अध्याय था।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 12 मार्च 1930 को दांडी से शुरू हुआ यह मार्च भारत के ग्रामीणों और युवाओं में एक नई क्रांति लेकर आया।
राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान कुछ क्रांतिकारी समूहों ने अहिंसात्मक मार्ग के अतिरिक्त हिंसात्मक विधियों को अपनाया। उनका मानना था कि ब्रिटिश सत्ता का खात्मा सशस्त्र संघर्ष के बिना संभव नहीं।
भगत सिंह और उनके साथियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कई सशस्त्र कार्य किए। उन्होंने युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाई। भगत सिंह द्वारा लाहौर षड्यंत्र और सांडर्स की हत्या प्रमुख घटनाएं थीं।
यह एक सशस्त्र क्रांतिकारी संगठन था जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सत्ता का उच्छेदन था। इसके सदस्यांनी कई आयुध हमले और बम विस्फोट किये।
लेमहिनर हत्याकांड 1912 में कोलकाता में हुआ था, जिसमें कुछ क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश अफसरों की हत्या की। इसका मकसद ब्रिटिश शासन को डरा कर स्वतंत्रता आंदोलन को तेज करना था।
1940 के दशक में स्वतंत्रता संग्राम ने अधिक तेज गति पकड़ी। नई रणनीतियाँ, व्यापक जनता का समर्थन, और द्वितीय विश्व युद्ध की परिस्थितियाँ स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अनुकूल रहीं।
इस आंदोलन में ब्रिटिश राज से तत्काल स्वतंत्रता की मांग की गई। यह आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ और पूरी भारतवर्ष में फैला।
द्वितीय विश्व युद्ध की स्थिति ने ब्रिटिश सत्ता को कमजोर कर दिया, जिससे स्वतंत्रता की मांग और भी तीव्र हो गई।
1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली और देश का विभाजन हुआ। यह राष्ट्रीय आंदोलन की लंबी प्रक्रिया का अंतिम पड़ाव था।
राष्ट्रीय आंदोलन में विभिन्न विचारधाराएं और नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस विषय में गणितीय या वैज्ञानिक सूत्रों का प्रयोग नहीं होता, अतः इस अनुभाग में कोई सूत्र सम्मिलित नहीं हैं।
Step 1: सैनिकों के असंतोष का कारण जानिए - नए कारतूस में गाय-सूअर की चर्बी इस्तेमाल, जिससे सैनिकों की धार्मिक भावना आहत हुई।
Step 2: राजनीतिक कारण - ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के शासकों का सत्ता क्षीण करना और भूमि नियंत्रण।
Step 3: सामाजिक-धार्मिक कारण - ब्रिटिश के सुधारों का विरोध, और भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की भावना।
Answer: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कारण - सैनिकों का धार्मिक आहत होना, ब्रिटिश की राजनीतिक नीतियाँ, और सामाजिक-धार्मिक असंतोष।
Step 1: ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई को अहिंसात्मक बनाया जाना।
Step 2: भारतीय वस्तुओं का स्वदेशी प्रचार और ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार।
Step 3: सरकारी सेवाओं से इस्तीफा और न्यायिक विरोध।
Step 4: सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना।
Answer: असहयोग आंदोलन के उद्देश्य थे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अहिंसात्मक संघर्ष, स्वदेशी प्रचार, सरकारी नौकरियों से त्याग और सामाजिक सुधार।
Step 1: यह असहयोग आंदोलन का अगला चरण था जो व्यापक जनसमर्थन मिला।
Step 2: समुद्र तट पर जाकर ब्रिटिश नमक अधिनियम का उल्लंघन किया गया, जो आम जनता को जोड़ने वाला कदम था।
Step 3: ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों को सीधे चुनौती दी गई।
Answer: नमक सत्याग्रह ने भारत के हर वर्ग को स्वतंत्रता संघर्ष में जोड़ा तथा अंग्रेजों की आर्थिक नीतियों को कमजोर किया।
Step 1: ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या सहित सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती दी।
Step 2: युवाओं में क्रांतिकारी विचारधारा का प्रचार किया।
Step 3: लाहौर षड्यंत्र और काका कालेलकर केस के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
Answer: भगत सिंह ने सशस्त्र संघर्ष, युवाओं में क्रान्तिकारी चेतना और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संगठित विद्रोह के माध्यम से योगदान दिया।
Step 1: स्थापना काल में कांग्रेस ने शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से सुधारों की मांग की। यह तत्काल स्वतंत्रता की मांग नहीं करता था।
Step 2: सहयोग स्थापित करना नहीं, बल्कि सुधार एवं भारतीयों की भागीदारी हेतु संघर्ष करना था।
Step 3: विकल्प 'C' सही है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मूल उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के तहत राजनीतिक एवं आर्थिक सुधारों की मांग करना था।
Step 4: विकल्प 'D' अति अप्रमाणिक व गलत है।
Answer: विकल्प (C) सही: ब्रिटिश सरकार से राजनीतिक तथा आर्थिक सुधार की मांग करना।
When to use: प्रश्नों में घटनाओं की शृंखला समझने और सही उत्तर चुनने के लिए
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