अंकगणित (Arithmetic) की संख्या प्रणाली में "परिमेय संख्याएँ" तथा "अपरिमेय संख्याएँ" दो अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक श्रेणियाँ हैं। इन दोनों वर्गों को समझना संख्या प्रणाली के समग्र ज्ञान के लिए अनिवार्य है, विशेषकर वास्तविक संख्याओं की पहचान एवं उनके व्यवहार को सही ढंग से समझने हेतु। इस अनुभाग में हम परिमेय और अपरिमेय संख्याओं की अवधारणा, स्वरूप, गुण, तथा विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से इन्हें विस्तार से समझेंगे।
उदाहरण के लिए, \(\frac{3}{4}\), \(-\frac{7}{2}\), 0, और 5 सभी परिमेय संख्याएँ हैं क्योंकि इन्हें पूर्णांकों के अनुपात के रूप में लिखा जा सकता है। यहाँ 5 को \(\frac{5}{1}\) के रूप में लिखा जाता है।
परिमेय संख्याएँ दो प्रकार की होती हैं:
परिमेय संख्याओं का दशमलव रूप बहुधा दो प्रकार का होता है:
इन संख्याओं का दशमलव रूप न न तो समापन दशमलव होता है और न ही कोई परावर्ती पैटर्न दिखाता है। वे दशमलव में अनंत और गैर-पुनरावर्ती श्रृंखला होती हैं।
प्रमुख अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण हैं:
परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का एकत्रित समूह वास्तविक संख्याओं (Real Numbers) का निर्माण करता है। यानि सभी वास्तविक संख्याएँ या तो परिमेय होंगी या अपरिमेय। वास्तविक संख्याएँ संख्या रेखा पर निरंतर रूप से फैली होती हैं जहाँ प्रत्येक बिंदु एक वास्तविक संख्या दर्शाता है।
परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें भिन्न रूप में व्यक्त किया जा सकता है और जिनका दशमलव रूप या तो समाप्त होता है या पुनरावर्ती होता है। अपरिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिनका भिन्न रूप नहीं बनता और जिनका दशमलव रूप अनंत और गैर-पुनरावर्ती होता है। दोनों के सम्मिलन से वास्तविक संख्याएँ बनती हैं जो संख्या रेखा पर संपूर्ण विस्तार प्रदान करती हैं।
Step 1: 7/8 एक भिन्न संख्या है, जहाँ 7 और 8 दोनों पूर्णांक हैं और हरजी संख्या 0 नहीं है। अतः यह परिभाषा अनुसार परिमेय संख्या है।
Step 2: दशमलव में रूपान्तर करें: \(\frac{7}{8} = 0.875\) (जो समाप्त दशमलव है)।
Answer: 7/8 परिमेय संख्या है जिसका दशमलव रूप 0.875 है।
Step 1: मान लें \(\sqrt{2} = \frac{p}{q}\), जहाँ \(p, q\) पूर्णांक हैं, \(q eq 0\), और \(\frac{p}{q}\) भिन्न पूर्णा रूप में है (यानी \(p\) और \(q\) का कोई सामान्य भाजक नहीं है)।
Step 2: दोनों पक्षों को वर्ग करें: \(2 = \frac{p^2}{q^2}\) => \(p^2 = 2q^2\)।
Step 3: \(p^2\) सम संख्या है (2 के गुणज), अतः \(p\) भी सम संख्या होगा (पूर्णांक गुणन नियम अनुसार)।
Step 4: मान लें \(p=2k\), तो \( (2k)^2 = 2q^2 \Rightarrow 4k^2 = 2q^2 \Rightarrow q^2 = 2k^2\)।
Step 5: इससे निष्कर्ष निकलता है कि \(q^2\) भी सम है, अतः \(q\) भी सम है।
Step 6: परंतु \(p\) और \(q\) दोनों सम होने का अर्थ है कि इनका कोई सामान्य भाजक है, जो कि मान के विरुद्ध है।
Answer: अतः \(\sqrt{2}\) परिमेय नहीं है, अर्थात् यह अपरिमेय संख्या है।
Step 1: \(\frac{3}{4} = 0.75\) है, जो एक स्पष्ट परिमेय संख्या है।
Step 2: \(\sqrt{2} \approx 1.4142135...\) जो अपरिमेय संख्या है।
Step 3: दोनों का योग होगा \(0.75 + 1.4142135 = 2.1642135...\) जो वास्तविक संख्या है और संख्या रेखा पर 2 और 3 के बीच स्थित है।
Step 4: चूंकि अपरिमेय संख्या के साथ परिमेय संख्या का योग अपरिमेय ही रह सकता है, इसीलिए यह योग अपरिमेय संख्या भी हो सकती है।
Answer: यह संख्या संख्या रेखा पर 2 से 3 के बीच में स्थित एक अपरिमेय वास्तविक संख्या है।
Step 1: \(\frac{5}{11}\) परिमेय संख्या है (पूर्णांक अनुपात)।
Step 2: \(\sqrt{16} = 4\) परिमेय है।
Step 3: \(\sqrt{3}\) अपरिमेय संख्या है क्योंकि 3 का वर्गमूल भिन्न के रूप में व्यक्त नहीं होता।
Step 4: 0.75 भी परिमेय है, \(\frac{3}{4}\) के समान।
Answer: विकल्प (ग) \(\sqrt{3}\) अपरिमेय संख्या है।
Step 1: (क) \(x+1\) अपरिमेय ही रहेगा क्योंकि परिमेय 1 को जोड़ने पर कुल राशि अपरिमेय बनी रहती है। यह सही है।
Step 2: (ख) \(x \times 0 = 0\) और 0 परिमेय संख्या है। यह कथन सही है।
Step 3: (ग) \(x - x = 0\) जो परिमेय है; इसलिए यह कथन गलत है।
Step 4: (घ) \(x^2\) अपरिमेय भी हो सकता है और परिमेय भी। उदाहरण के लिए \(\sqrt{2}\) अपरिमेय है, लेकिन \((\sqrt{2})^2 = 2\) परिमेय है; अतः यह कथन गलत है।
Answer: केवल कथन (क) और (ख) सही हैं।
When to use: जब किसी संख्या के परिमेय या अपरिमेय होने का परीक्षण करना हो।
When to use: वर्गमूल के आधार पर प्रश्न हल करते समय।
When to use: अपरिमेयता सिद्ध करने वाले प्रश्नों में।
When to use: योग या गुणनफल के प्रश्नों में उपयुक्त निर्णय के लिए।
When to use: त्वरित उत्तर एवं अनुमान आवश्यक होने पर।
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