गणित में संख्याएँ (Numbers) वे मात्राएँ हैं जिनका उपयोग वस्तुओं की मापन, गणना और मात्रा व्यक्त करने के लिए किया जाता है। वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) संख्या प्रणाली का एक प्रयोगात्मक और व्यापक वर्ग है, जिसमें सभी प्रकार की संख्याएँ सम्मिलित होती हैं। इनमें प्राकृत संख्याएँ, पूर्णांक, परिमेय (rational) और अपरिमेय (irrational) संख्याएँ शामिल हैं। वास्तविक संख्याएँ गणितीय आधार हैं जिनपर अंकगणित, बीजगणित, त्रिकोणमिति, तथा गणित के अन्य क्षेत्रों की संरचना आधारित होती है।
परिभाषा: वास्तविक संख्याएँ वे सभी संख्याएँ हैं जो रेखीय संख्यात्मक धुरी पर किसी निश्चित स्थान पर व्यक्त हो सकती हैं।
वास्तविक संख्याएँ चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित की जाती हैं:
परिमेय संख्याएँ ऐसा प्रतिमेय (fractional) रूप प्रस्तुत करती हैं जिसमें पूर्णांक भाग और भिन्नात्मक भाग दोनों को दो पूर्णांकों के अनुपात के रूप में लिखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, \(\frac{1}{2} = 0.5\) एक परिमेय संख्या है।
अपरिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिनका दशमलव विस्तार समाप्त नहीं होता और न ही वह आवर्ती श्रृंखला होती है; यह निरंतर बदलती रहती हैं। उदाहरण के लिए, \(\sqrt{2} = 1.4142135...\) और \(\pi = 3.1415926...\)
वास्तविक संख्याओं के बीच गुण और संक्रियाएँ गणित की आधारशिला हैं, जो हमें अंकगणितीय क्रियाएँ सम्पन्न करने की अनुमति देती हैं। वे निम्नलिखित प्रकार हैं:
वास्तविक संख्याएँ सुसंगठित क्रम में होती हैं। इसका अर्थ है कि कोई भी दो वास्तविक संख्याएँ (\(a\) और \(b\)) इस प्रकार होती हैं कि या तो \(a < b\) है, \(a = b\) है, या \(a > b\) है। इसलिए, वास्तविक संख्याएँ किसी संख्यापंक्ति (number line) पर रूपांकित की जा सकती हैं।
अंतराल (Intervals) निश्चित सीमा के भीतर के संख्याओं का समूह होता है, जैसे \([2,5]\) का अर्थ है 2 और 5 के बीच सभी वास्तविक संख्याएँ।
वास्तविक संख्याएं गणित के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, भौतिकी इत्यादि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन्हें समझने के लिए आवश्यक है कि प्राकृत संख्याओं, पूर्णांकों और परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं के गुण ठीक से ज्ञात हों। पूर्णांक और परिमेय संख्याओं का ज्ञान हमें LCM और HCF जैसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने की आधारशिला प्रदान करता है, जो आगे के अध्यायों में विस्तार से आएंगे।
Step 1: \(\frac{3}{4}\) को देखेंगे। चूँकि यह दो पूर्णांकों का अनुपात है, अतः यह परिमेय संख्या है।
Step 2: \(\sqrt{5}\) का शत-प्रतिशत मान अनंत दशमलव और गैर-आवर्ती होता है, अतः यह अपरिमेय संख्या है।
Step 3: 0.666... का दशमलव आवर्ती है (सबसे सरल रूप \(\frac{2}{3}\)) अतः यह परिमेय संख्या है।
Step 4: \(\pi\) के दशमलव एक्सपैंशन अनंत और गैर-आवर्ती होता है, अतः अपरिमेय संख्या है।
Answer: परिमेय संख्याएँ: \(\frac{3}{4}\), 0.666...; अपरिमेय संख्याएँ: \(\sqrt{5}\), \(\pi\)
Step 1: \(x > y\) और \(x^2 > y^2\) अपेक्षित है। पर ध्यान दें कि \(x\) तथा \(y\) की संख्या चिह्न महत्वपूर्ण है।
Step 2: यदि दोनों सकारात्मक हों, तो \(x > y\) से \(x^2 > y^2\) भी होगा।
Step 3: यदि दोनों नकारात्मक हों जैसे \(x = -2\), \(y = -3\), तब \(x > y\) है किन्तु \(x^2 = 4 < 9 = y^2\) होगा। अतः हमेशा सत्य नहीं है।
Answer: केवल \(x,y\) दोनों सकारात्मक हों तब ही \(x > y \Rightarrow x^2 > y^2\) सत्य होगा। अन्यथा नहीं।
Step 1: 12 के भागक: 1, 2, 3, 4, 6, 12 | 18 के भागक: 1, 2, 3, 6, 9, 18
Step 2: HCF निकालते हैं: 1, 2, 3, 6 सामान्य भागक हैं, अतः सबसे बड़ा, HCF = 6
Step 3: LCM निकालते हैं: सबसे छोटा सामान्य गुणज जो 12 और 18 दोनों से विभाजित हो जाता है वह 36 है।
Step 4: सूत्र जांचें: \(LCM \times HCF = 12 \times 18\)
\(36 \times 6 = 216\) एवं \(12 \times 18 = 216\) सत्य हुआ।
Answer: \(\text{HCF} = 6, \text{LCM} = 36\) एवं \(LCM \times HCF = a \times b\) सिद्ध।
Step 1: 0.333... आवर्ती दशमलव है, अतः परिमेय संख्या है।
Step 2: 0.141414... आवर्ती दशमलव है, अतः परिमेय संख्या है।
Step 3: 1.4142135... दशमलव पूर्णतः समाप्त या आवर्ती नहीं है, यह \(\sqrt{2}\) के बराबर है, अतः अपरिमेय संख्या है।
Answer: 0.333... और 0.141414... परिमेय; 1.4142135... अपरिमेय संख्या है।
Step 1: HCF और LCM के नियम के अनुसार: \(a \times b = HCF \times LCM = 5 \times 180 = 900\)
Step 2: \(a = 5x, b = 5y\) जहाँ \(x, y\) परस्पर अभाज्य (coprime) पूर्णांक हैं।
Step 3: इसलिए, \(5x \times 5y = 25xy = 900 \Rightarrow xy = \frac{900}{25} = 36\)
Step 4: हमें ऐसे \(x, y\) जोड़े खोजने हैं जिनका गुणनफल 36 हो तथा वे परस्पर अभाज्य हों:
(2, 18), (3, 12), (6,6) परस्पर अभाज्य नहीं हैं।
Answer: \(a, b\) के संभावित जोड़े हैं: (5x1, 5x36) = (5, 180) एवं (5x4, 5x9) = (20, 45)
When to use: जब परिमेय या अपरिमेय संख्या पहचाननी हो।
When to use: दो संख्याओं का HCF या LCM जल्दी निकालने के लिए।
When to use: LCM या HCF में से किसी एक के अभाव में समस्या को हल करने के लिए।
When to use: दशमलव स्वरूप से संख्याओं की प्रकृति निर्धारित करते समय।
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