अर्थशास्त्र की एक महत्वपूर्ण शाखा है माँग सिद्धांत (Demand Theory), जो इस बात की व्याख्या करता है कि उपभोक्ता अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं की माँग कैसे करते हैं। उपभोक्ता व्यवहार (Consumer Behaviour) इस सिद्धांत का आधार है जो उपभोक्ताओं के निर्णयों का अध्ययन करता है कि वे किन वस्तुओं को, कितनी मात्रा में, कब और किस मूल्य पर खरीदते हैं। इस अध्याय में हम उपभोक्ता की प्राथमिकताओं से लेकर उपयोगिता व सीमांत उपयोगिता तथा माँग वक्र तक की संकल्पनाओं को विस्तार से समझेंगे।
उपभोक्ता की प्राथमिकताएँ वे विकल्प और पसंदें होती हैं जिन्हें वह वस्तुओं और सेवाओं के बीच चुनता है। अर्थशास्त्र में यह मानना एक बुनियादी सिद्धांत है कि उपभोक्ता अपनी संतुष्टि (satisfaction) को अधिकतम करने का प्रयास करता है। यह प्राथमिकताएँ व्यक्तिगत होती हैं, अर्थात एक उपभोक्ता की प्राथमिकताएँ दूसरे से भिन्न हो सकती हैं।
उदाहरण के लिए, यदि दो वस्तुएँ हैं - सेब और केला - तो एक उपभोक्ता को सेब ज्यादा पसंद हो सकते हैं पर दूसरे को केला। इन प्राथमिकताओं के आधार पर उपभोक्ता अपनी आवश्यकताओं के अनुसार वस्तुओं का चयन करता है।
उपयोगिता (Utility) का अर्थ है किसी वस्तु या सेवा से उपभोक्ता को प्राप्त होने वाली संतुष्टि या लाभ। इसे हम यह समझ सकते हैं कि किसी वस्तु को उपयोग कर अथवा उसे प्राप्त कर उपभोक्ता को कितनी खुशी या संतुष्टि मिलती है।
उपयोगिता को मात्रात्मक रूप से मापा जाता है और इसे अक्सर निश्चित इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, जिन्हें हम 'यूटिल' कहते हैं।
उदाहरण: यदि एक उपभोक्ता को एक ग्लास जल पीने से 10 यूटिल की संतुष्टि मिलती है और दूसरा ग्लास पीने पर 6 यूटिल, तो पहला ग्लास उसकी आवश्यकताओं को ज्यादा बेहतर ढंग से पूरा करता है।
जब उपभोक्ता किसी वस्तु की एक से अधिक इकाइयाँ प्राप्त करता है तो प्रत्येक इकाई से प्राप्त उपयोगिता जोड़कर कुल उपयोगिता प्राप्त होती है।
उदाहरण: यदि पहली इकाई से 15 यूटिल, दूसरी से 10 यूटिल और तीसरी से 5 यूटिल की संतुष्टि मिलती है, तो कुल उपयोगिता होगी: 15 + 10 + 5 = 30 यूटिल।
सीमांत उपयोगिता से तात्पर्य किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने से कुल उपयोगिता में होने वाले परिवर्तन से है।
सीमांत उपयोगिता का सूत्र:
इसका अर्थ यह है कि यदि किसी वस्तु की मात्रा में 1 इकाई की वृद्धि से कुल उपयोगिता में 5 यूटिल का इजाफा होता है, तो सीमांत उपयोगिता 5 यूटिल होगी।
मांग वक्र (Demand Curve) वह आरेख है जो किसी वस्तु की कीमत (Price) और उसकी माँगी गई मात्रा (Quantity Demanded) के बीच संबंध को दर्शाता है।
आमतौर पर मांग वक्र नीचे की ओर ढलान वाला होता है, जिसका अर्थ है कि कीमत घटने पर माँगी गई मात्रा बढ़ती है और कीमत बढ़ने पर माँगी गई मात्रा घटती है। इसे मांग का नियम (Law of Demand) कहा जाता है।
मांग के कुछ प्रमुख कारक होते हैं जैसे- वस्तु की कीमत, उपभोक्ता की आय, वस्तु की प्रतिस्थापना कीमतें, उपभोक्ता की अभिरुचियाँ एवं प्राथमिकताएँ। इस प्रकार हम मांग को इस प्रकार भी अभिव्यक्त कर सकते हैं:
मांग फ़ंक्शन:
चरण 1: कुल उपयोगिता निकालें:
पहली इकाई: 20 यूटिल
दूसरी इकाई: 20 + 15 = 35 यूटिल
तीसरी इकाई: 35 + 10 = 45 यूटिल
चौथी इकाई: 45 + 5 = 50 यूटिल
चरण 2: सीमांत उपयोगिता निकालें:
MU2 = TU2 - TU1 = 35 - 20 = 15 यूटिल
MU3 = TU3 - TU2 = 45 - 35 = 10 यूटिल
MU4 = TU4 - TU3 = 50 - 45 = 5 यूटिल
उत्तर: सीमांत उपयोगिता क्रमशः 15, 10, 5 यूटिल है।
चरण 1: मूल्य और मात्रा का संबंध देखें:
कीमत घटने से मात्रा बढ़ी (Rs.100 से Rs.80 और 50 से 70)।
चरण 2: मांग के नियम का परीक्षण करें:
यह मांग के नियम (Law of Demand) के अनुरूप है, जो कहता है कि वस्तु की कीमत घटने पर माँगी गई मात्रा बढ़ती है।
उत्तर: इस परिस्थिति में मांग वक्र का नियम सही पाया गया।
चरण 1: सीमांत उपयोगिताओं को जोड़ें:
पहली इकाई: 12 यूटिल
दूसरी इकाई: 12 + 8 = 20 यूटिल
तीसरी इकाई: 20 + 4 = 24 यूटिल
चौथी इकाई: 24 + 0 = 24 यूटिल
पाँचवीं इकाई: 24 + (-3) = 21 यूटिल
उत्तर: कुल उपयोगिता क्रमशः 12, 20, 24, 24, और 21 यूटिल है।
चरण 1: मान लें उपभोक्ता X की \(X\) इकाइयाँ और Y की \(Y\) इकाइयाँ खरीदता है।
चरण 2: बजट सीमा समीकरण:
\[ 20X + 50Y = 1000 \]
जहाँ \(X\) और \(Y\) वस्तुओं की मात्राएँ हैं, और Rs.1000 पूर्ण आय है।
उत्तर: बजट समीकरण: \(20X + 50Y = 1000\)
चरण 1: आय और माँगी गई मात्रा के बीच संबंध देखें:
आय बढ़ने पर माँगी गई मात्रा भी बढ़ी (Rs.1500 से Rs.1800, 40 से 50)।
चरण 2: वस्तु के प्रकार का निर्धारण:
साधारण वस्तु में आय बढ़ने पर माँग बढ़ती है, और नीच वस्तु में माँग घटती है।
उत्तर: यह एक साधारण वस्तु है।
When to use: उपभोक्ता की संतुष्टि व व्यवहार से जुड़े सवालों में
When to use: किसी भी मांग सम्बन्धी ग्राफिकल प्रश्न में
When to use: उपभोक्ता विकल्प व मांग मात्रा पर आधारित प्रश्नों में
When to use: मांग की आय लोच और उपभोक्ता व्यवहार के प्रश्नों में
When to use: उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांतों को समझाते समय
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