पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) जीव और उनके आवास का एक प्राकृतिक तंत्र है, जिसमें उत्पादन, उपभोग और अपघटन क्रियाएं निरंतर चलती रहती हैं। इस तंत्र के तीन मुख्य घटक होते हैं: उत्पादक (Producers), उपभोक्ता (Consumers) और अपघटक (Decomposers)। ये सभी आपस में जैविक, रासायनिक और ऊर्जा संबंधी संवाद करते हैं जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है। इस अनुभाग में, हम इन्हीं तीनों के लाभ और कार्यप्रणाली को विस्तार से समझेंगे।
पर्यावरण में उत्पादक वे जीव होते हैं जो अपनी भोजन बनाने की क्षमता रखते हैं। ये मुख्यतः हरित पौधे, शैवाल एवं कुछ बैक्टीरिया होते हैं जो प्रकाशसंश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया द्वारा सौर ऊर्जा का उपयोग कर कार्बन डायऑक्साइड एवं जल से खाद्य पदार्थ (ग्लूकोज) उत्पन्न करते हैं।
प्रकाशसंश्लेषण क्रिया है जिसमें:
6CO2 + 6H2O + सूर्य की ऊर्जा -> C6H12O6 + 6O2
इस क्रिया में सूर्य की ऊर्जा को रसायनिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, जो जीवों के लिए ऊर्जा स्रोत का कार्य करती है।
यह चित्र सूर्य से प्रकाश ऊर्जा प्राप्त कर हरित पत्ती में प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया दर्शाता है।
उपभोक्ता वे जीव होते हैं जो अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं। ये उत्पादकों या अन्य उपभोक्ताओं द्वारा तैयार किए भोजन को ग्रहण करते हैं। उपभोक्ताओं को उनके पोषण स्रोत के आधार पर तीन प्रकारों में बांटा जाता है।
ये शाकाहारी जीव होते हैं जो सीधे उत्पादकों को खाते हैं। उदाहरण: घोड़ा, गाय, खरगोश।
ये मांसाहारी या सर्वाहारी जीव होते हैं जो प्राथमिक उपभोक्ताओं का शिकार करते हैं। उदाहरण: शेर, लोमड़ी।
ये उच्च श्रेणी के मांसाहारी होते हैं जो द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं। उदाहरण: बाज, मगरमच्छ।
अपघटक वे जीव होते हैं जो मृत जीवों, जीवाणु निक्षेप, और फेंके गए जैविक पदार्थों को तोड़ कर उनके अवयवों को पुनः पोषक तत्वों के रूप में परिवर्तित करते हैं। वे प्राकृतिक पुनर्चक्रण (Nutrient Recycling) की प्रक्रिया को संभव बनाते हैं और इस प्रकार जैविक तत्वों को पुनः मिट्टी में लोटाते हैं।
अपघटक मृत और अपशिष्ट पदार्थ को तोड़कर कार्बन, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्वों को पुनः भूमि तथा जल में लौटाते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में तत्वों का पुनर्नवीनीकरण होता है।
उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक एक-दूसरे के साथ खाद्य श्रृंखलाओं के माध्यम से जुड़े होते हैं। उत्पादन से शुरू होकर ऊर्जा का प्रवाह उपभोक्ताओं में और अंततः अपघटकों को जाता है, जो इस ऊर्जा और पोषक तत्वों के पुनचक्रण का कार्य करते हैं। इस प्रकार ये तीनों मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं।
graph TD A[सूर्य से ऊर्जा] --> B[उत्पादक (हरित पौधे)] B --> C[प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी)] C --> D[द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी)] D --> E[अपघटक (कवक, जीवाणु)] E --> B
चरण 1: उत्पादक वे जीव होते हैं जो स्वयं भोजन तैयार करते हैं।
चरण 2: पेड़ प्रकाशसंश्लेषण करते हैं, अतः उत्पादक हैं। अन्य विकल्प उपभोक्ता या अपघटक हैं।
उत्तर: (ब) पेड़
चरण 1: प्राथमिक उपभोक्ता शाकाहारी होते हैं जो उत्पादकों को खाते हैं।
चरण 2: जलीय पौधे उत्पादक हैं, शार्क और कछुआ उपभोक्ता हैं। जलीय कीटपतंगे पौधों को खाते हैं, इसलिए प्राथमिक उपभोक्ता।
उत्तर: (ब) जलीय कीटपतंगे
चरण 1: अपघटक मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों को तोड़ते हैं।
चरण 2: ये पोषक तत्वों को पुनः मिट्टी और जल में लौटाते हैं जो पौधों के लिए आवश्यक हैं।
उत्तर: अपघटक पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराते हुए जैविक चक्र पूरा करते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र स्थिर रहता है।
चरण 1: ऊर्जा हमेशा उत्पादकों से होकर उपभोक्ताओं की ओर प्रवाहित होती है।
चरण 2: इस लक्ष्य में ऊर्जा घास (उत्पादक) से खरगोश (प्राथमिक उपभोक्ता) और फिर लोमड़ी (द्वितीयक उपभोक्ता) को जाती है।
उत्तर: ऊर्जा का प्रवाह: घास -> खरगोश -> लोमड़ी
चरण 1: अपघटक मृत जीवों को तोड़ते हैं और पोषक तत्व पुनः उपलब्ध कराते हैं।
चरण 2: कवक, बैक्टीरिया अपघटक हैं, हिरण उपभोक्ता है।
उत्तर: (स) हिरण
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