पारिस्थितिकी तंत्र में कार्बन और नाइट्रोजन चक्र उन मूलभूत प्रक्रियाओं में से हैं जिनके द्वारा पृथ्वी पर जीवन को आवश्यक पोषक तत्वों का संचरण होता है। कार्बन चक्र में कार्बन की गति व परिवर्तन शामिल होते हैं, जो जीव-जंतु एवं वातावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। नाइट्रोजन चक्र में ग्रह के नाइट्रोजन की विभिन्न अवस्थाएँ और उनका जैविक उपयोगिता हेतु परिवर्तन होता है। इन प्रक्रियाओं को समझना पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्बन चक्र जल, वायु, जीव-जंतु और भू-भाग में कार्बन की अभिव्यक्ति और पुनःप्राप्ति की प्रक्रिया को कहते हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्बन के स्रोत वे स्थान या प्रक्रियाएँ हैं जहाँ से कार्बन वातावरण में जारी होता है, जैसे जीवों का श्वसन, जीवाश्म ईंधन का दहन, जंगली और कृषि ज्वालाएं। जबकि सिंक वे स्थान हैं जहाँ कार्बन संग्रहित या अवशोषित होता है, जैसे हरित पौधे, महासागर और मिट्टी। यह संतुलन पृथ्वी के तापमान और जलवायु को नियंत्रित करता है।
फोटोसिंथेसिस एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें पौधे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) लेकर ऊर्जा के रूप में सूर्य की रोशनी का उपयोग करते हुए कार्बनिक युक्तियाँ बनाते हैं। फार्मूला:
श्वसन (Respiration) वह प्रक्रिया है जिसमें जीव ग्लूकोज को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करते हैं और CO2 वापस वातावरण में छोड़ते हैं।
उद्योगों, वन्य निर्वाचन, जीवाश्म ईंधन जलाने, वृक्ष कटाई और खेती में कीटनाशकों तथा उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कार्बन चक्र प्रभावित होता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
नाइट्रोजन चक्र पृथ्वी पर नाइट्रोजन गैस (N2) के विभिन्न रूपों का जैविक क्रियाओं द्वारा उपयोग के हेतु रूपांतरण और पुनःमूल्यन करने की प्रक्रिया है। यह चक्र सभी जीवों के लिए आवश्यक प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल तथा अन्य जैविक अणुओं के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन गैस को जीवाणु या बवंडर की मदद से उपयोगी अमोनियम यौगिकों में बदला जाता है। उदाहरण के लिए, राइज़ोबियम जीवाणु जो मटर जैसे पौधों की जड़ों में रहते हैं, नाइट्रोजन को अमोनिया (NH3) में बदल देते हैं।
नाइट्रीफिकेशन एक दो-कदम की जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें अमोनिया पहले नाइट्राइट (NO2-) और फिर नाइट्रेट (NO3-) में परिवर्तित होता है। इसके लिए विशेष बैक्टीरिया जैसे नाइट्रोसोमोनास और नाइट्रोबैक्टर जिम्मेदार होते हैं।
डी-नाइट्रीफिकेशन वह प्रक्रिया है जिसमें नाइट्रेट को नाइट्रोजन गैस में बदलकर वापस वायुमंडल में छोड़ा जाता है, जो नाइट्रोजन चक्र का अंतिम चरण है। यह प्रक्रिया एनारोबिक बैक्टीरिया द्वारा की जाती है।
जैसे कीटनाशक और उर्वरक का अत्यधिक प्रयोग, नाइट्रोजन चक्र को असंतुलित करता है। इससे नाइट्रोजन प्रदूषण, जल प्रदूषण और ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ता है। इसी प्रकार, नदियों तथा जलाशयों में नाइट्रोजन युक्त खाद्य पदार्थों का अतिप्रवाह (Eutrophication) जैव विविधता के लिए हानिकारक है।
चरण 1: फोटोसिंथेसिस समीकरण अनुसार 6 moles CO2 से 1 mole C6H12O6 बनता है।
चरण 2: CO2 का मॉलर द्रव्यमान = 44 g/mol, ग्लूकोज का मॉलर द्रव्यमान = 180 g/mol।
चरण 3: कितना ग्लूकोज बनेगा, \( \frac{360}{44} \) moles CO2 से:
\( \frac{360}{44} \times \frac{1}{6} = \frac{360}{264} = 1.36 \text{ moles ग्लूकोज} \)
चरण 4: इसका द्रव्यमान होगा: \( 1.36 \times 180 = 244.8 \text{ ग्राम} \)
उत्तर: 360 ग्राम CO2 से लगभग 244.8 ग्राम ग्लूकोज बनेगा।
चरण 1: नाइट्रोजन स्थिरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल से अमोनिया या अन्य नाइट्रोजन युक्त यौगिकों का निर्माण किया जाता है, जो पौधों के लिए उपयोगी हैं।
चरण 2: उदाहरण के लिए, राइज़ोबियम जीवाणु प्याज, मटर जैसे फसलों की जड़ों में रहते हैं और N2 को NH3 में बदलते हैं।
उत्तर: यह प्रक्रिया नाइट्रोजन चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो जैविक उपयोग के लिए नाइट्रोजन तैयार करता है।
चरण 1: नाइट्रीफिकेशन दो चरणों वाली प्रक्रिया है।
चरण 2: पहले चरण में नाइट्रोसोमोनास बैक्टीरिया NH3 को NO2- में बदलते हैं।
चरण 3: दूसरे चरण में नाइट्रोबैक्टर बैक्टीरिया NO2- को NO3- में परिवर्तित करते हैं।
उत्तर: ये दोनों बैक्टीरिया नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी नाइट्रेट में बदलने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
चरण 1: जीवाश्म ईंधन जलाने से वायुमंडल में अतिरिक्त CO2 उत्सर्जित होता है।
चरण 2: यह अतिरिक्त CO2 ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ाता है जिससे ग्लोबल वार्मिंग होती है।
चरण 3: प्राकृतिक कार्बन सिंक (जैसे वन और महासागर) इस अतिरिक्त CO2 को अवशोषित नहीं कर पाते जिससे पर्यावरण असंतुलित होता है।
उत्तर: जीवाश्म ईंधन का अधिक उपयोग कार्बन चक्र के संतुलन को भंग कर जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है।
चरण 1: नाइट्रीफिकेशन, डी-नाइट्रीफिकेशन, और अमोनिफिकेशन नाइट्रोजन चक्र के महत्वपूर्ण चरण हैं।
चरण 2: फोटोसिंथेसिस कार्बन चक्र से संबंधित है, न कि नाइट्रोजन चक्र से।
उत्तर: (D) फोटोसिंथेसिस नाइट्रोजन चक्र का हिस्सा नहीं है।
When to use: जब स्रोत-सिंक सम्बंधित प्रश्न आएं।
When to use: नाइट्रोजन चक्र के जीवाणु आधारित प्रश्नों में।
When to use: जैव रासायनिक परिवर्तन के प्रश्नों में।
When to use: समापन या संतुलन से जुड़े अवधारणात्मक प्रश्नों में।
When to use: प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन से जुड़े प्रश्न में।
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