पत्र व्यवहार वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा दो या अधिक व्यक्तियों, संस्थाओं अथवा कार्यालयों के बीच लिखित भाषा के माध्यम से सोच, भाव, सूचनाएँ तथा आदेश आदि का आदान-प्रदान होता है। इसे संप्रेषण (communication) की सबसे प्राचीन और प्रभावी साधन कहा जाता है।
कार्यालय प्रक्रिया में पत्र व्यवहार का विशेष महत्त्व होता है क्योंकि इसे माध्यम से कार्यालयीय निर्णय, निर्देश, अनुरोध, शिकायत और सूचना आदि व्यवस्थित एवं औपचारिक रूप से प्रेषित होती है।
मानव सभ्यता की आरंभिक अवस्था से ही संप्रेषण का विकास हुआ। प्रारंभिक रूप में लेखन-सूची, छपाई और हस्तलेखन पत्र व्यवहार के प्रारूप थे। आधुनिक युग में ई-मेल, फेक्स और इंटरनेट के द्वारा पत्र व्यवहार में तीव्रता और सुलभता आई है, किन्तु कार्यालयों में अभी भी पारंपरिक पत्राचार का महत्त्व बना हुआ है।
पत्र व्यवहार में विभिन्न प्रकार के पत्र होते हैं, जिनका चयन उद्देश्य, विषय और प्राप्तकर्ता के आधार पर होता है।
| पत्र का प्रकार | उद्देश्य | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|
| औपचारिक पत्र | कार्यालय अथवा सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए | शिष्ट भाषा, निश्चित ढाँचा, अनुशासित स्वरूप |
| अनौपचारिक पत्र | व्यक्तिगत संवाद जैसे मित्रों या परिवार के बीच | मुक्त एवं भावपूर्ण भाषा, स्वच्छंद संरचना |
| नोटिस एवं विज्ञापन | सूचना प्रसार के लिए | संक्षिप्त, स्पष्ट एवं आकर्षक शैली |
हर पत्र लिखने के पीछे एक निश्चित प्रक्रिया होती है, जो पत्र के उद्देश्य, प्राप्तकर्ता और विषय के अनुसार भिन्न होती है। प्रभावी पत्र लेखन के निम्नलिखित चरण होते हैं।
पत्र का विषय (Topic) और उद्देश्य (Purpose) स्पष्ट होना आवश्यक है, जैसे शिकायत करना, सूचना देना, अनुरोध करना आदि।
पत्र के प्रकार के अनुसार उचित प्रारूप (Format) चुना जाता है। औपचारिक पत्रों में मुख्यतः अभिवादन, मुख्य भाग, निष्कर्ष और समापन होते हैं।
सुस्पष्ट, विनम्र एवं सरल हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए। संस्कृत शब्दों का उचित समावेश और व्याकरण की शुद्धता आवश्यक है।
पत्र के पूर्ण होने के बाद उसे सावधानीपूर्वक पढ़कर अशुद्धियाँ तथा त्रुटियाँ सुधारनी चाहिए।
प्रत्येक औपचारिक पत्र में निम्नलिखित अंश होते हैं जो पत्र को सुव्यवस्थित बनाते हैं।
शिष्टाचार में सम्मान, विनम्रता, स्पष्टता और तर्क सम्मतता आवश्यक होती है।
पत्र व्यवहार से कार्यालय में विभिन्न आदेश, सूचनाएँ, निवेदन, रिपोर्ट और निर्णयों का औपचारिक आदान-प्रदान होता है। यह कार्यालय के समुचित और प्रभावी संचालन में मुख्य भूमिका निभाता है।
साथ ही, कार्यालय में नोटिंग एवं ड्राफ्टिंग, फ़ाइल प्रबंधन तथा रिकॉर्ड रखरखाव जैसे अन्य प्रक्रियाओं से पत्र व्यवहार घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
Step 1: पत्र का शीर्षक और तिथि लिखें।
Step 2: प्राप्तकर्ता का पता सही तरीके से प्रविष्ट करें।
Step 3: विषय स्पष्ट रूप से बताएं: 'नियुक्ति की सूचना'.
Step 4: अभिवादन करें: 'माननीय महोदय,'.
Step 5: मुख्य भाग में नियुक्ति का विवरण, पद, प्रारंभ तिथि आदि लिखें।
Step 6: विनम्र समापन करें: 'भवदीय,' और नाम-पद जोड़ें।
Answer: एक औपचारिक पत्र जिसका प्रारूप उचित हो।
Step 1: तिथि और प्राप्तकर्ता का पता लिखें।
Step 2: विषय में 'कार्यालय सफाई सम्बन्धी शिकायत' उल्लेख करें।
Step 3: सम्मान पूर्वक अभिवादन करें।
Step 4: मुख्य भाग में समस्या का विस्तृत वर्णन करें, जैसे सफाई में कमी, गंदगी।
Step 5: समाधान हेतु उचित कृती का सुझाव दें।
Step 6: धन्यवाद ज्ञापन एवं समापन करें।
Answer: साफ, विनम्र और सटीक शिकायत पत्र तैयार करें।
Step 1: कार्यालय शीर्षक, तिथि और प्राप्तकर्ता लिखें।
Step 2: विषय स्पष्ट करें: 'मीटिंग सम्बन्धी सूचना'.
Step 3: अभिवादन के बाद मीटिंग का दिन, तिथि और समय स्पष्ट करें।
Step 4: उपस्थित रहने का आग्रह विनम्रता से करें।
Step 5: धन्यवाद ज्ञापन और समापन करें।
Answer: एक औपचारिक सूचना पत्र कार्यक्षम रूप में।
Step 1: तिथि एवं प्राचार्य का पता लिखा।
Step 2: विषय में 'अवकाश हेतु आवेदन' लिखें।
Step 3: 'माननीय महोदय,' से पत्र आरंभ करें।
Step 4: अपनी स्थिति स्पष्ट करें और छुट्टी हेतु कारण बताएं।
Step 5: छुट्टी स्वीकार करने का अनुरोध करें।
Step 6: धन्यवाद सहित समापन करें।
Answer: शिष्ट, स्पष्ट और औपचारिक आवेदन पत्र।
Step 1: प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता के विवरण लिखें।
Step 2: विषय में सेवा का नाम और आकर्षक शीर्षक करें।
Step 3: भावपूर्ण, स्पष्ट भाषा में सेवा के लाभ और विशेषताएँ बताएं।
Step 4: सेवा का उपयोग कैसे करें, शुल्क आदि की जानकारी दें।
Step 5: ग्राहकों को सेवा ग्रहण हेतु प्रेरित करें।
Step 6: धन्यवाद के साथ समापन करें।
Answer: प्रभावी, ग्राहक-केंद्रित विज्ञापन पत्र।
जब उपयोग करें: प्रत्येक पत्र से पूर्व लक्ष्य निर्धारित करने के लिए।
जब उपयोग करें: सभी कार्यालयीय पत्र लेखन में।
जब उपयोग करें: प्राप्तकर्ता को पत्र विषय तुरंत समझाने के लिए।
जब उपयोग करें: सकारात्मक प्रभाव छोड़ने के लिए।
जब उपयोग करें: लेखन पूर्ण कर अंतिम प्रस्तुति से पूर्व।
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