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भाषा विकास एवं बोलने का क्रम

परिचय: भाषा विकास एवं बोलने का क्रम

बाल जीवन में भाषा विकास (Language Development) सांस्कृतिक, सामाजिक एवं संज्ञानात्मक विकास का अभिन्न अंग है। भाषा केवल संप्रेषण (communication) का माध्यम नहीं बल्कि बालक के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक विकास का आधार भी होती है। इसलिए भाषा विकास का अध्ययन बाल विकास की अवधारणा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

भाषा विकास की परिभाषा: बालक के समग्र संज्ञानात्मक विकास के अंतर्गत अभिव्यक्ति, समझ, और संवाद की क्षमताओं का क्रमिक विकास।

इस परिचय खंड में भाषा विकास की प्रक्रिया, इसके चरण, तथा बोलने के क्रम को विस्तार से समझा जाएगा।

भाषा विकास की प्रक्रिया एवं महत्त्व

भाषा विकास तीन मुख्य आयामों पर होता है: सुनना (Listening), समझना (Understanding) और बोलना (Speaking)। ये तीनों पक्ष परस्पर संबंधित हैं। भाषा सीखने का आरंभ शिशु के जन्म से ही सुनने की क्षमता से होता है। सुनने के माध्यम से बालक संवेदनशील होकर शब्दों की व्युत्पत्ति समझने लगता है। इसके बाद समझना एवं अंततः बोलना प्रारंभ होता है।

भाषा विकास के महत्त्व को इस प्रकार संक्षेपित किया जा सकता है:

  • संप्रेषण के माध्यम से ज्ञान और भावनाओं का आदान-प्रदान संभव होता है।
  • संज्ञानात्मक विकास में सहायता प्रदान करता है, जैसे सोचने, समझने की क्षमता।
  • सामाजिक एवं भावनात्मक संबंधों के निर्माण में सहायक।
  • शैक्षणिक उपलब्धियों एवं व्यावसायिक सफलता के लिए आधार।

भाषा विकास के चरण

भाषा विकास क्रम सामान्यतः निम्नलिखित चरणों में विभक्त होता है:

  1. श्रोत्रीय प्रतिक्रिया (Pre-linguistic Stage): जन्म से लेकर लगभग 1 वर्ष तक यह अवस्था होती है, जिसमें बालक ध्वनि पहचानता है, मिमिक्स करता है, हिलहिलाहट करता है, किंतु स्पष्ट शब्दों का उच्चारण नहीं करता।
  2. प्रारंभिक भाषण (Single-word Stage): लगभग 12 से 18 महीने के बीच बालक प्रथम शब्द बोलना प्रारंभ करता है, जैसे "माँ", "दूध", "पानी"।
  3. वाक्यविन्यास प्रारंभ (Two-word Stage): 18-24 महीने के बीच दो शब्दों के छोटे-छोटे वाक्य बनाते हैं, जैसे "माँ आओ", "दूध दो"।
  4. वाक्य वृद्धि (Telegraphic Stage): 2 से 3 वर्ष में छोटे वाक्यों का निर्माण होता है, जिनमें आवश्यक शब्द होते हैं, लेकिन कुछ छोटी बातें अभी भी छूटी होती हैं।
  5. पूर्ण वाक्य और संवाद (Later Stages): 3 से 5 वर्ष तक बालक लंबे, व्याकरणयुक्त वाक्यों का प्रयोग करता है और संवाद की सामर्थ्य विकसित करता है।
श्रोत्रीय प्रतिक्रिया प्रारंभिक शब्द दो शब्द वाक्य टेलीग्राफिक वाक्य पूर्ण संवाद

बोलने का क्रम (Speech Sequence)

बालक में बोलने का क्रम भी भाषा विकास के साथ जुड़ा होता है। अधिकतर शोधकर्ताओं के अनुसार बोलने की प्रक्रिया निम्न क्रमिक चरणों से गुज़रती है:

  • साधारण ध्वनियाँ निकालना (Cooing)
  • हीकार-पीकार जैसी ध्वनियाँ निकालना (Babbling)
  • पहला शब्द बोलना
  • शब्दों को जोड़कर सरल वाक्य बनाना
  • विस्तृत वाक्य एवं पूर्ण संवाद विकास
उदाहरण: एक बालक के लिए "माँ" शब्द का प्रथम उच्चारण उसका पहला पूर्णवाक्य होता है, जो संप्रेषण के लिए उसका प्रारंभिक प्रयास है।

भाषा विकास के सिद्धांत

भाषा विकास के अध्ययन में कई प्रमुख मनोवैज्ञानिक एवं भाषावैज्ञानिक सिद्धांत प्रस्तुत हुए हैं। यहाँ दो मुख्य सिद्धांतों का संक्षिप्त परिचय एवं उनकी सीमाओं का उल्लेख किया गया है।

पियाजे का संज्ञानात्मक दृष्टिकोण (Piaget's Cognitive Theory)

जीन पियाजे (Jean Piaget) के अनुसार भाषा विकास संज्ञानात्मक विकास का परिणाम है। उनका मानना था कि भाषा विकास बच्चे के संज्ञानात्मक स्तर पर निर्भर करता है। जब बालक विभिन्न क्रियाओं और वातावरण से परिचित होता है तब उसकी सोच एवं भाषा विकासित होती है।

पियाजे के अनुसार भाषा सीखना सहज एवं सक्रिय प्रक्रिया है, और बच्चे को पर्यावरण से सीखने का अवसर मिलना आवश्यक है। भाषा सोच का प्रकाशन (expression of thought) है न कि उसकी पूर्व शर्त।

सीमाएँ: पियाजे का सिद्धांत भाषा के सामाजिक आयाम को कम महत्व देता है। वाइगोत्स्की जैसे अन्य सिद्धांत इससे भिन्‍न सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर ज़ोर देते हैं।

वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण (Vygotsky's Sociocultural Theory)

लैव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) ने भाषा विकास को सामाजिक परस्पर क्रिया और सांस्कृतिक संदर्भ में समझने का प्रयास किया। उनके अनुसार भाषा पहली बार सामाजिक संवाद के रूप में विकसित होती है, तत्पश्चात् आंतरिक भाषा (inner speech) के रूप में आत्म-विचार का आधार बनती है।

वाइगोत्स्की ने 'Zone of Proximal Development' (ZPD) की अवधारणा दी, जो उस क्षेत्र को दर्शाती है जहाँ बालक सहायता से नए कौशल सीख सकता है। भाषा इस सहायता का प्रमुख माध्यम है।

graph TDA[भाषा विकास] --> B[सामाजिक संवाद]B --> C[कोशिश]C --> D[हीन सहायता]D --> E[स्वतंत्र भाषा उपयोग]

यह सिद्धांत सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों और शिक्षण की भूमिका को प्रमुखता से दर्शाता है।

सीमाएँ: वाइगोत्स्की के सिद्धांत में संज्ञानात्मक विकास की जटिलताओं को कम रेखांकित किया गया है, जबकि पियाजे ने इसे केंद्र में रखा। दोनों सिद्धांत परस्पर पूरक हैं किंतु पूर्ण प्रतिस्पर्धी नहीं।

भाषा विकास को प्रभावित करने वाले कारक

भाषा विकास पर अनेक कारक प्रभाव डालते हैं। इन्हें मुख्यतः तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  • आनुवांशिक कारक: बालक की शारीरिक एवं न्यूरोलॉजिकल संरचना, मस्तिष्क के वाचा-केंद्र (Broca's area, Wernicke's area) का विकास, वंशानुगत प्रवृत्तियाँ।
  • पर्यावरणीय कारक: बालक का परिजन, बहिर्मुखी अनुभव, अभिव्यक्तियों की जड़ता, भाषा का लगातार प्रयोग, उपकरण और शिक्षा की उपलब्धता।
  • सांस्कृतिक एवं सामाजिक प्रभाव: परिवार एवं समुदाय की भाषा, सामाजिक व्यवहार, सांस्कृतिक परंपराएँ, शिक्षा प्रणाली।

मुख्य पर्यावरणीय कारक

  • संकल्पना आधारित संरक्षण: बच्चे को सुनाने और संवाद में संलग्न करने से भाषा विकास बढ़ता है।
  • मॉडलिंग: बालक पर भाषा के प्रभावशाली नमूने पेश करना।
  • प्रतिक्रिया: बच्चे की भाषा प्रयोग पर सही प्रतिक्रिया देना।

वर्क्ड उदाहरण

उदाहरण 1: भाषा विकास के चरणों की पहचान Easy
एक 18 महीने के शिशु की भाषा विकास अवस्था क्या होगी?

चरण 1: भाषा विकास के चरणों को याद करें: श्रोत्रीय प्रतिक्रिया, प्रारंभिक शब्द, दो शब्द वाक्य, टेलीग्राफिक वाक्य, पूर्ण संवाद।

चरण 2: 18 महीने के बालक की अवस्था प्रारंभिक शब्द से दो शब्द वाक्य के बीच होती है।

चरण 3: अतः बालक पहला शब्द बोलना प्रारंभ कर चुका होगा या दो शब्द वाक्य बनाना शुरू कर सकता है।

उत्तर: 18 महीने के बालक का भाषा विकास प्रारंभिक शब्द या दो शब्द वाक्य चरण में होगा।

उदाहरण 2: वाइगोत्स्की का ZPD अर्थ बताइए Medium
वाइगोत्स्की के अनुसार बालक का 'Zone of Proximal Development' (ZPD) क्या है?

चरण 1: ZPD वह क्षेत्र है जहाँ बालक स्वयं नहीं कर सकता पर उचित सहायता से कर सकता है।

चरण 2: यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और सामाजिक सहायता से बच्चे की क्षमता विकसित हो सकती है।

चरण 3: भाषा शिक्षण में ZPD का अर्थ है बालक की वर्तमान समझ से थोड़ी अधिक ज्ञान वाली भाषा को सीखने की क्षमता।

उत्तर: ZPD वह सीमित क्षेत्र है जहाँ बालक सहायता से नई भाषाई क्षमता सीख सकता है।

उदाहरण 3: भाषा विकास में आनुवांशिक एवं पर्यावरणीय कारकों का महत्व Medium
यह समझाइए कि आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक भाषा विकास को कैसे प्रभावित करते हैं?

चरण 1: आनुवांशिक कारक बालक के मस्तिष्क संरचना, संज्ञानात्मक क्षमता, तथा वाचा से जुड़े अंगों की दक्षता निर्धारित करते हैं।

चरण 2: पर्यावरणीय कारक जैसे माता-पिता का संवाद, भाषा की उपलब्धता, सांस्कृतिक वातावरण भाषा अभ्यास को प्रभावित करते हैं।

चरण 3: दोनों कारक सह कार्य करते हैं: आनुवांशिक संभावनाएँ पर्यावरण द्वारा परिपूर्ण होती हैं।

उत्तर: आनुवांशिक कारक भाषा सीखने की जैविक क्षमता देते हैं और पर्यावरणीय कारक उसे संवारने एवं विकसित करने में सहायक होते हैं।

उदाहरण 4 (परीक्षा शैली): बालक का बोली का विकास किस चरण में टेलीग्राफिक वाक्य प्रकट होते हैं? Easy
नीचे से सही विकल्प चुनिए: टेलीग्राफिक वाक्य विकास किस आयु समूह में होता है?
(a) जन्म के पहले 6 महीने
(b) 6-12 महीने
(c) 2-3 वर्ष
(d) 4-5 वर्ष

चरण 1: टेलीग्राफिक वाक्य का अर्थ छोटे वाक्य होते हैं जिनमें आवश्यक शब्द होते हैं, जैसे "माँ आओ"।

चरण 2: यह चरण 2 से 3 वर्ष की आयु में आता है।

उत्तर: विकल्प (c) 2-3 वर्ष सही है।

उदाहरण 5 (परीक्षा शैली): वाइगोत्स्की के सिद्धांत के संदर्भ में भाषा विकास के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्या है? Medium
वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा विकास के लिए निम्न में से कौन सी बात सर्वाधिक आवश्यक है?
(a) मस्तिष्क की जैविक संरचना
(b) सामाजिक संवाद और सहयोग
(c) जन्मजात भाषाई क्षमता
(d) स्वतंत्र सोच

चरण 1: वाइगोत्स्की ने भाषा विकास में सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ की भूमिका को प्रमुख माना।

चरण 2: सामाजिक संवाद और सहयोग बच्चे को भाषा सीखने में सहायता करता है।

उत्तर: विकल्प (b) सामाजिक संवाद और सहयोग सही है।

शेष विकल्प क्यों गलत हैं:

  • (a) मस्तिष्क की संरचना आवश्यक है लेकिन वाइगोत्स्की की प्राथमिकता सामाजिक प्रक्रिया है।
  • (c) जन्मजात भाषा क्षमता सिद्धांत विघटित है; वाइगोत्स्की इसे मुख्य नहीं मानते।
  • (d) स्वतंत्र सोच भाषा विकास का परिणाम हो सकता है, लेकिन आरंभिक कारण नहीं।

Tips & Tricks

Tip: भाषा विकास के चरणों को याद रखने के लिए उन्हें एक समयरेखा पर सोचें: श्रोत्रीय प्रतिक्रिया -> प्रथम शब्द -> दो शब्द वाक्य -> टेलीग्राफिक वाक्य -> पूर्ण संवाद।

When to use: भाषा विकास की क्रमागत प्रकृति को समझना हो।

Tip: पियाजे के संज्ञानात्मक और वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांतों के बीच अंतर याद रखने के लिए: "पियाजे सोच के आधार पर भाषा" vs "वाइगोत्स्की सामाजिक संवाद पर आधारित"।

When to use: सिद्धांतों के अंतरों पर आधारित प्रश्‍नों के उत्तर देने के लिए।

Tip: परीक्षा में अक्सर ZPD के विकल्प आते हैं; इसे याद रखें कि यह 'सहायता की सीमा' है जहाँ बच्चा बीना सहायता के कुछ नहीं कर सकता, सहायता के साथ सीख सकता है।

When to use: वाइगोत्स्की से संबंधित प्रश्नों में तेज़ी से सही उत्तर चुनने हेतु।

Tip: भाषा विकास में पर्यावरणीय कारकों को सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में सोचें न कि केवल संवाद तक सीमित; यह परिवार, शिक्षा और संस्कृति से जुड़ा है।

When to use: बहुविकल्पीय प्रश्नों में कारकों के बीच अंतर करने के लिए।

Tip: बोलने के क्रम (cooing, babbling, first words etc.) को बच्चे के जन्म से संबंधित उम्र के साथ जोड़कर याद रखें।

When to use: भाषा विकास की अवस्थाओं के लिए अवधियों के प्रश्नों में।

Common Mistakes to Avoid

❌ भाषा विकास को केवल आनुवांशिकी से जोड़ना और पर्यावरणीय भूमिका को नकारना।
✓ भाषा विकास में आनुवांशिक और पर्यावरणीय दोनों कारकों को सहायक और परस्पर संबंधित मानना आवश्यक है।
यह गलती इसलिए होती है क्योंकि आनुवांशिकता स्पष्ट और ठोस लगती है, जबकि पर्यावरणीय भूमिका अप्रत्यक्ष दिखाई देती है, लेकिन दोनों मिले बिना पूर्ण विकास संभव नहीं।
❌ पियाजे के सिद्धांत को सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत समझना।
✓ पियाजे ने भाषा को संज्ञानात्मक विकास का परिणाम माना, सामाजिक संवाद वाइगोत्स्की के सिद्धांत का केंद्र है।
सिद्धांतों में सामाजिक और संज्ञानात्मक दृष्टिकोणों की स्पष्ट भिन्नता होती है, भ्रम से परीक्षा में गलत उत्तर संभावित है।
❌ भाषा विकास के चरणों को संपूर्ण उम्र में एकसाथ सीख लेना, जिससे उम्रानुसार क्रम याद ना रहे।
✓ भाषा विकास के चरणों को क्रमबद्ध और आयु-विशिष्ट समझकर याद करना चाहिए।
क्रमबद्धता न समझने पर विषय का संतुलित ज्ञान नहीं बन पाता और परीक्षा में दोषपूर्ण उत्तर होते हैं।
Key Concept

भाषा विकास का समग्र स्वभाव

भाषा विकास शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयामों का समन्वय है। यह बच्चे के सम्पूर्ण विकास का संकेतक है।

सारांश: भाषा विकास एवं बोलने का क्रम

  • भाषा विकास में क्रमबद्ध चरण होते हैं: सुनना -> समझना -> बोलना।
  • पियाजे और वाइगोत्स्की के दृष्टिकोण भाषा विकास के दो महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं।
  • भाषा विकास आनुवांशिक, पर्यावरणीय और सामाजिक कारकों से प्रभावित होता है।
  • बोलने का क्रम शिशु की संवेदी से शाब्दिक संवाद तक की प्रक्रिया है।
  • भाषा विकास अध्ययनों में सामाजिक संवाद की भूमिका को प्राथमिकता देना चाहिए।
Key Takeaway:

भाषा विकास एक जटिल, बहुआयामी एवं क्रमिक प्रक्रिया है जो बालक के समग्र विकास की आधारशिला बनती है।

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